सरकार ने दलील पेश करते हुए कहा कि वैधानिक कानून पर थोप दिया गया है पूर्ण पाबंदी वाला न्याययिक कानून - khabarupdateindia

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Tuesday, 14 July 2026

सरकार ने दलील पेश करते हुए कहा कि वैधानिक कानून पर थोप दिया गया है पूर्ण पाबंदी वाला न्याययिक कानून


रफीक खान
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को स्थगित कर दिया है, जिसमें गौ हत्या पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया था। तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई कि वैधानिक कानून के ऊपर न्याययिक कानून थोप दिया गया है। लंबी बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा बकरीद के पूर्व मद्रास हाई कोर्ट द्वारा लगाए गए बैन पर अंतरिम रोग लगाने का आदेश पारित किया हैं।Presenting its argument, the government stated a judicial ruling imposing a total ban has been superimposed upon the statutory law.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कहा जाता है कि सुप्रीम कोर्ट ने पाया है कि मद्रास हाई कोर्ट का प्रदेश-व्यापी प्रतिबंध लगाने वाले आदेश के अंतिम पैराग्राफ में पहली नजर में 'सुधार' की जरूरत है। इस केस में तमिलनाडु सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने पैरवी की। तमिलनाडु सरकार की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि हाई कोर्ट का आदेश तमिलनाडु एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट,1958 का विरोधाभासी है। इसके तहत सक्षम अधिकारी द्वारा जारी सर्टिफिकेट के आधार पर 10 साल से ज्यादा उम्र की वह गाय, जो कि काम में इस्तेमाल या बच्चा देने लायक नहीं हैं, उनकी हत्या की अनुमति है। इस कानून के अलावा राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को प्रिवेंशन ऑफ क्रुअलिटी टू एनिमल्स एक्ट, 1960, प्रिवेंशन ऑफ क्रुअलिटी टू एनिमल्स (स्लाउटर हाउस) रूल्स, 2001, तमिलनाडु अर्बन लोकल बॉडीज एक्ट, 1998 और तमिलनाडु अर्बन लोकल बॉडीज रूल्स, 2023 के आधार पर भी चुनौती दी थी। तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि पूर्ण पाबंदी का आदेश देकर मद्रास हाई कोर्ट ने वैधानिक कानून पर न्यायिक कानून थोप दिया है। उल्लेखनीय है कि मद्रास हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने के बाद 27 मई, 2027 को बकरीद की पूर्व संध्या पर हिंदू मक्कल कच्ची के महासचिव के सूर्या पारसनाथ की पीआईएल पर जस्टिस जीआर स्वामिनाथन और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायण ने यह आदेश जारी किया था। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि 'कुर्बानी' सिर्फ तय स्थानों पर ही दी जाएं। हालांकि, मद्रास हाई कोर्ट ने गाय और बछड़ों की किसी भी जगह और किसी भी दिन हत्या करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया। अपने आदेश में हाई कोर्ट ने सरकार के उस आदेश को शामिल किया, जिसमें कहा गया है कि दूध उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बेहतर करने के लिए गो-हत्या पर प्रतिबंध आवश्यक है।