रफीक खान
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में वकालत करने वाली महिला वकील वीणा गौतम का नाम गुंडा लिस्ट में दर्ज होने के मामले में नया मोड़ आया है। पुलिस द्वारा तीन आपराधिक मामलों के आधार पर उन्हें गुंडा सूची में शामिल कर लिया गया था। महिला वकील ने इसका विरोध किया और उन्होंने अदालत को बताया कि सारे मामले एसडीएम कोर्ट से निरस्त किए जा चुके हैं। निचली अदालत में पुलिस पर ₹200000 क्षतिपूर्ति देने का आदेश पारित कर दिया था। चुनौती के बाद मामला सेशन कोर्ट में पहुंचा और वहां से पुलिस ने 2 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति का आदेश निरस्त कर दिया। सेशन कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने महिला वकील का नाम गुंडा लिस्ट में दुर्भावना पूर्वक शामिल नहीं किया, इसलिए दुर्भावना पूर्ण नहीं कहा जा सकता। पुलिस की कार्रवाई सिर्फ निवारक कार्रवाई थी। The police had prepared a formal complaint based on three criminal cases, but the court set aside the fine of ₹2 lakh.
जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि भोपाल जिला बार एसोसिएशन के वर्ष 2019-21 के चुनाव के दौरान वरिष्ठ महिला वकील वीणा गौतम ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन थाना प्रभारी द्वारा दुर्भावना पूर्ण उनके खिलाफ झूठा इस्तगासा तैयार किया गया है। पुलिस ने 22 सितंबर 2020 को उनका नाम गुंडा लिस्ट में शामिल कर लिया है। जिसका क्रमांक 721 पुलिस की गुंडा सूची में दर्ज है। पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मामले जब एसडीएम न्यायालय में पहुंचाये गए तो वह प्रचलन योग्य नहीं पाए गए। वीणा गौतम को जब एसडीएम कोर्ट से राहत मिल गई तो उन्होंने इसे अपनी प्रतिष्ठा धूमिल करने का मुद्दा बनाते हुए सिविल दावा पेश किया। निचली अदालत ने उनके दावे को स्वीकार करते हुए पुलिस अधिकारियों पर ₹200000 की क्षतिपूर्ति निर्धारित कर दी थी। पुलिस ने जिला अदालत में मामले की अपील की और जज अजय पेंडम की कोर्ट ने पुलिस पर निर्धारित क्षतिपूर्ति को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी उल्लेखित किया कि किसी निवारक कार्रवाई का बाद में न्यायिक स्तर पर निरस्त हो जाना, मात्र इस आधार पर संबंधित पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई को दुर्भावना पूर्ण नहीं बना सकता है।
