डिप्टी कलेक्टर की 1.28 करोड़ की संपत्ति हुई राजसात, लोकायुक्त के चंगुल में आए अफसर के मामले में विशेष न्यायालय ने जारी किया आदेश - khabarupdateindia

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डिप्टी कलेक्टर की 1.28 करोड़ की संपत्ति हुई राजसात, लोकायुक्त के चंगुल में आए अफसर के मामले में विशेष न्यायालय ने जारी किया आदेश





Rafique Khan


मध्यप्रदेश शासन में डिप्टी कलेक्टर रहे हुकुमचंद सोनी के एक मामले में लोकायुक्त पुलिस विशेष स्थापना शाखा के लिए गठित विशेष न्यायालय ने 1.28 करोड रुपए की संपत्ति राजसात करने के आदेश पारित किए हैं। विशेष कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार समाज व परिवार के लिए अत्यधिक खतरनाक है। भ्रष्ट आचरण न सिर्फ जीते जी बल्कि मौत के बाद भी उसके कार्यों को प्रमाणित करता रहता है। यह कृत्य पूर्णता निंदनीय है और इसे किसी भी कीमत पर उदारता के लायक नहीं माना जा सकता है।


जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश विशेष न्यायालय अधिनियम 2011 के तहत गठित विशेष न्यायालय के न्यायाधीश गंगाचरण दुबे ने लोकायुक्त के एक मामले में आदेश जारी किया। प्रकरण के अनुसार, डिप्टी कलेक्टर हुकुमचंद सोनी के यहां लोकायुक्त पुलिस ने 27 जून 2011 को छापा मारा था। हुकुमचंद सोनी का निधन हो चुका है। सोनी के यहां से 1.78 करोड़ की चल-अचल संपत्ति व बीमा पॉलिसी मिली, जो उनके साथ पत्नी व पांच बेटी, दामाद व समधन के नाम पर भी थी। लोकायुक्त पुलिस ने संपत्ति को राजसात करने के लिए कोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसमें सभी को नोटिस देकर जवाब मांगा गया। जिला अभियोजन अधिकारी संजीव श्रीवास्तव के निर्देश पर विशेष लोक अभियोजक डॉ. पदमा जैन ने पैरवी की। न्यायाधीश दुबे ने अपने आदेश में सोनी की पत्नी व बेटियों की ओर से पेश की गई दलीलों को खारिज कर दिया। स्त्री धन को छोड़कर 1.28 करोड़ की संपत्ति राजसात करने का आदेश किया।

आय से 356.96 प्रतिशत अधिक संपत्ति

जानकारी के अनुसार सोनी की नियुक्ति 19 नवंबर 1975 को लिपिक के रूप में हुई थी। विभागीय परीक्षाएं देकर नायब तहसीलदार, तहसीलदार और डिप्टी कलेक्टर तक पहुंचे। नौकरी के दौरान वे पूरे समय उज्जैन संभाग में ही पदस्थ रहे। लोकायुक्त जांच में खुलासा हुआ था कि सोनी के पास आय से 356.96 प्रतिशत अधिक संपत्ति पाई गई। भ्रष्टाचार को लेकर विशेष न्यायालय के न्यायाधीश गंगाचरण दुबे ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जैसे मछली पानी में रहते हुए कब पानी पीती है या नहीं पीती है, इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। उसी प्रकार सरकारी सेवक सेवा के दौरान कब अपने पद का दुरुपयोग कर सकता है या नहीं, इसका अनुमान लगाना कठिन होता है।