व्यापम घोटाला : PMT में फर्जीवाड़ा कर बने 7 डॉक्टरों को 7-7 साल की सजा, सभी को भेजा गया जेल - khabarupdateindia

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व्यापम घोटाला : PMT में फर्जीवाड़ा कर बने 7 डॉक्टरों को 7-7 साल की सजा, सभी को भेजा गया जेल


रफीक खान
मध्य प्रदेश के व्यावसायिक परीक्षा मंडल [व्यापम] घोटाला मामले में अदालत से एक सनसनीखेज खबर सामने आई है। वर्ष 2008-09 में आयोजित की गई पीएमटी PMT की परीक्षा में फर्जीबड़ा कर सॉल्वर की मदद से चयनित होकर मेडिकल डिग्री हासिल करने वाले 7 डॉक्टरों को अदालत ने 7 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इन सभी को शुक्रवार की शाम जेल भेज दिया गया। फर्जीवाड़ा को उजागर करने की कार्यवायी मध्य प्रदेश की एसटीएफ STF इकाई ने की थी। दंडित हुए डॉक्टरो पर सश्रम कारावास के अलावा 10-10000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

जानकारी के मुताबिक बताया जाता है कि व्यापम द्वारा 2009 में आयोजित पीएमटी परीक्षा में सॉल्वर की मदद से परीक्षा उत्तीर्ण कर एमबीबीएस करने वाले आरोपी 7 डॉक्टरों को विशेष न्यायालय सीबीआई CBI (व्यापम केस भोपाल) ने 7-7 वर्ष का सश्रम करावास और 10-10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। मामले की शिकायत एसटीएफ से की गई थी। जांच के बाद डॉक्टर प्रशांत मेश्राम खेरलांजी बालाघाट, अजय टेगर बामोर मुरैना, अनिल चौहान ग्राम पल्या बड़वानी, हरिकिशन जाटव गंगाराम का पुरा बामोर मुरैना, शिवशंकर प्रसाद त्योंथर रीवा, अमित बड़ौले ग्राम फत्यापुर बड़वानी, सुलवंत सिंह मौर्य विवेकानंद काॅलोनी झाबुआ के खिलाफ म.प्र. मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया था। इस पर विशेष न्यायाधीश सीबीआई (व्यापमं केस भोपाल) नीतिराज सिंह सिसोदिया की कोर्ट ने इन सातों को 7-7 वर्ष सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया।

सभी आरोपितों की ओएमआर शीट जब्त की गई

एसटीएफ ने जांच में पाया कि सभी ने परीक्षा किसी अन्य व्यक्ति (साल्वर) की मदद से उत्तीर्ण की, जिसके आधार पर इन्हें गांधी मेडिकल कालेज भोपाल में एमबीबीएस पाठ्यकम में प्रवेश मिला था। इसके बाद सभी आरोपितों की ओएमआर शीट जब्त की गई। आवेदन पत्र एवं मेडिकल कालेज में प्रस्तुत आवेदन पत्र में लगाए गए फोटो भी भिन्न पाए गए। हस्तलिपि विशेषज्ञ की जांच से हस्ताक्षर नमूना भी अलग-अलग व्यक्ति का होना पाया गया। इसके बाद एसटीएफ पुलिस ने सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर अपराध दर्ज किया था।