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SC का आदेश: केंद्रीय विद्यालय प्राध्यापकों की ना रोकी जाए जॉइनिंग अथवा सैलरी, अपीलीय याचिका में अटॉर्नी जनरल ने दिया आश्वासन




Rafique Khan

सुप्रीम कोर्ट ने लगभग 1 दर्ज़न विशेष अनुमति याचिकाओं (एस. एल. पी) में सुनवाई के दरमियान अटॉर्नी जेनरल आर. वेंकटरमणी के आश्वाशन पर हाल ही में सैकड़ों की संख्या में स्थान्तरित किये गए केंद्रीय विद्यालय प्राध्यापकों के संबंध में निर्देशित किया कि केंद्रीय विद्यालय संघठन (के. वी. एस) उनकी जॉइनिंग अथवा सैलरी न्यायालय में याचिका लंबित रहते हुए रोकी न जाए | केंद्रीय विद्यालय संघठन द्वारा लगभग 2 दर्ज़न प्रकरणों में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की याचिका के विरुद्ध सुको में अपीलीय याचिका दाखिल की है। जिनके द्वारा पूर्व में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा सभी स्थानांतरण आदेशों को निरस्त करते हुए पुनः नवीन आदेश जारी करने की छुट प्रदान की थी| उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में पाया गया था कि थोक में जो स्थानांतरण आदेश केंद्रीय विद्यालय संगठन द्वारा अपने प्राध्यापकों के मध्य प्रदेश के बाहर किये गए थे, उनमे उपयुक्त एवं उचित तरीके से सोच विचार नहीं किया गया| उच्च न्यायालय के इन सभी आदेशों के विरुद्ध केंद्रीय विद्यालय संघठन ने सुको में अपीली याचिका दाखिल की, जिस पर मंगलबार को सुनवाई हुई|

प्राध्यापकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा एवं अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता उपस्थित हुए। जिनकी तरफ से यह कहा गया की अपीली याचिकाकर्ता के लंबित रहते हुए प्राध्यापकों को उनके पूर्व के स्कूलों में जॉइनिंग देने में अथवा सैलरी प्रदान करने में अड़चने हो रही है एवं उस पर अन्यायस अटकले ना लगायी जाए|

हाई कोर्ट ने यह दिया था आदेश

ज्ञातव है कि केंद्रीय विद्यालय संघठन केंद्र शासन की मानव संसाधन विभाग के अंतर्गत आने वाली इकाई है, जोकि देश भर में 5000 से ज़्यादा केंद्रीय विद्यालय स्कूलों का संचालन करती है| गत वर्ष नवंबर दिसंबर 2022 में सैकड़ों प्राध्यापकों के स्थान्तरण किये गए थे, जिनको मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय तक इस आधार पर चुनौती दी गयी की उनको बिना किसी सोच विचार के, अनुचित रूप से 1000/1500 किलोमीटर दूर ऐसे राज्यों में स्थानांतरित कर दिया गया, जहाँ पर वे वहाँ की क्षेत्रीय भाषा से परिचित तक नहीं थे| स्थानांतरण को इस आधार पर भी चुनौती दी गयी की के. वी. एस. द्वारा तानाशाही बतौर प्राध्यापकों के स्थानांतरण कर दिए गए, जिसमे उनकी व्यक्तिगत कठिनाइयों एवं समस्याओं को पूर्णतः अनदेखा कर दिया | उच्च न्यायालय द्वारा सभी स्थानांतरण आदेशों को निरस्त करते हुए ये कहा गया की जिस आधार पर यह स्थानांतरण किये गए, अर्थात की संघठन के पास स्कूलों में नियुक्त करने हेतु अध्यापकों की घोर कमी थी, वह आधार अब वर्तमान परिस्थितियों में अस्तित्व में नहीं है एवं चूँकि नविन नियुक्तियां कर ली गयी है, तो ऐसी परिवर्तित परिस्थितियों में स्थानांतरण आदेश की आवश्यकता समाप्त हो जाती है |

हाई कोर्ट के आदेश के विरुद्ध KVS पहुंचा SC

जनकारी के अनुसार उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध के. वी. एस द्वारा सभी प्रकरणों में एस. एल. पी सुको के समक्ष दायर की, जिसपर कल विस्तृत सुनवाई हुई | सुनवाई के दरमियान प्राध्यापकों के अधिवक्ताओं द्वारा ये समस्या व्यक्त की गयी की चूकिं उच्च न्यायालय द्वारा उनके स्थानांतरण आदेश निरस्त किये जा चुके है, तो वे अपने पूर्व में पदस्थ स्कूलों में जॉइनिंग देना चाहते है, जहाँ पर जॉइनिंग स्वीकार नहीं की जा रही है एवं जिससे उनकी मासिक तनख्वाह पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है| मात्र सुको में के. वी. एस ही एस. एल. पी के लंबित रहने के चलते उनकी जॉइनिंग पर रोक ना लगाई जाए एवं उनको अपने पूर्व के केंद्रीय विद्यालयों में समुचित रूप से सेवाएं देने की अनुमति दी जाए |
इस तर्क पर अटॉर्नी जेनरल आर. वेंकटरमणी द्वारा न्यायालय को आश्वासन दिया गया की भले ही एस. एल. पी सुको में लंबित है परन्तु किसी भी प्राध्यापक के विरुद्ध विपरीत कार्यवाही नहीं की जाएगी एवं के. वी. एस द्वारा नयी स्थानांतरण नीति लायी जा रही है, जिसको अगली तिथि तक न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर दिया जायेगा | SC ने उपरोक्त तथ्यों की तारतम्य में सभी प्रकरणों में अगली सुनवाई 29.01.2024 को नियत कर दी है |
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