SC में बाबा रामदेव ने फिर गाया "माफी राग", कहा-67 अखबारों में छप चुके हैं माफी नामा, जस्टिस बोले- साइज दिखाओ, कहीं माइक्रोस्कोप से ना पढ़ना पड़े - khabarupdateindia

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SC में बाबा रामदेव ने फिर गाया "माफी राग", कहा-67 अखबारों में छप चुके हैं माफी नामा, जस्टिस बोले- साइज दिखाओ, कहीं माइक्रोस्कोप से ना पढ़ना पड़े


रफीक खान
बाबा रामदेव मंगलवार को फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। उन्होंने दोबारा माफी राग अलापा। सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 67 अखबारों में वह माफी नामा छपवा चुके हैं और वायदा करते हैं कि इस तरह की गलती को कभी भी नहीं दोहराया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने माफी नामा वाले विज्ञापन पर कहा कि आप अखबारों की कटिंग लेकर आईए, उसे चेक करके देखेंगे कि आखिर कितने साइज में विज्ञापन का प्रकाशन हुआ है? कहीं विज्ञापन को देखने और पढ़ने के लिए माइक्रोस्कोप की जरूरत तो नहीं पड़ रही है।

जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि मंगलवार को बाबा रामदेव और बालकृष्ण चौथी बार कोर्ट के सामने पेश हुए। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने पतंजति के 2022 के एक विज्ञापन में एलोपैथी के खिलाफ गलतफहमी फैलाने का आरोप लगाया है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अमानतुल्लाह की बेंच में पतंजलि की ओर से एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने कहा- हमने माफीनामा फाइल कर दिया है। इसे 67 अखबारों में पब्लिश किया गया है। इस पर जस्टिस हिमा कोहली ने कहा- आपके विज्ञापन जैसे रहते थे, इस ऐड का भी क्या साइज वही था? कृपया इन विज्ञापनों की कटिंग ले लें और हमें भेज दें। इन्हें बड़ा करने की जरूरत नहीं है। हम इसका वास्तविक साइज देखना चाहते हैं। ये हमारा निर्देश है। जस्टिस कोहली ने कहा कि जब आप कोई विज्ञापन प्रकाशित करते हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि हम उसे माइक्रोस्कोप से देखेंगे। सिर्फ पन्ने पर न हो पढ़ा भी जाना चाहिए।
टीटी आईपीओñकोर्ट ने रामदेव और बालकृष्ण को निर्देश दिया कि अगले दो दिन में वे ऑन रिकॉर्ड माफीनामा जारी करें, जिसमें लिखा हो कि उन्होंने गलती की। मामले की अगली सुनवाई अब 30 अप्रैल को होगी। 
 
SC ने लगाई आईएमए IMA को भी फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) को भी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा- एलोपैथी के डॉक्टर भी मरीजों को महंगी और अनावश्यक दवाएं लिखते हैं। सवाल IMA पर भी उठता है। आप भी अपना रुख साफ करें। FMCG कंपनियां शिशुओं, स्कूल जाने वाले बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले प्रोडक्ट्स के विज्ञापन प्रकाशित करके जनता को धोखा दे रही हैं। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लाइसेंसिंग अधिकारियों को मामले में पक्षकार बनाने के भी निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को पिछले 3 साल में भ्रामक विज्ञापनों पर उनके द्वारा की गई कार्रवाई के संबंध में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा- हम बच्चों, शिशुओं, महिलाओं को देख रहे हैं और किसी को भी भ्रमित नहीं किया जा सकता। केंद्र सरकार को भी आंखें खोलनी होंगी।