हाईकोर्ट का अहम फैसला: अपराध नहीं है पत्नी से अप्राकृतिक यौन संबंध बनाना, पत्नी की असहमति का कोई महत्व नहीं, पति के खिलाफ दर्ज FIR रद्द - khabarupdateindia

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हाईकोर्ट का अहम फैसला: अपराध नहीं है पत्नी से अप्राकृतिक यौन संबंध बनाना, पत्नी की असहमति का कोई महत्व नहीं, पति के खिलाफ दर्ज FIR रद्द


रफीक खान
कानूनी रूप से विवाहित पत्नी के साथ स्थापित किए गए अप्राकृतिक यौन संबंध दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखे जा सकते। पत्नी की अगर असहमति है तो भी वह अपराध नहीं होता। पत्नी की असहमति महत्वहीन है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस जीएस अहलूवालिया MP High court Justice GS Ahluwaliya ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए पति के विरुद्ध लगाए गए दुष्कर्म के आरोपो को खारिज करते हुए एफआईआर रद्द करने के आदेश पारित किया। हाईकोर्ट द्वारा अप्राकृतिक यौन संबंध आईपीसी की धारा 377 के तहत दायर किए जाने वाले अपराधों के मामलों में यह एक बहुत ही ऐतिहासिक फैसला पारित किया है।

जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि जस्टिस जीएस अहलूवालिया की एकल पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अप्राकृतिक यौन संबंध (unnatural physical relation) दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता। इस पर और अधिक विचार-विमर्श की आवश्यकता नहीं है कि क्या एफआईआर तुच्छ आरोपों के आधार पर दर्ज की गई थी या नहीं।' फैसले में कहा गया है कि अगर एक वैध पत्नी विवाह के दौरान अपने पति के साथ रह रही है तो किसी पुरुष द्वारा अपनी ही पत्नी के साथ, जो कि 15 वर्ष से कम न हो के साथ कोई यौन संभोग दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। आदेश में कहा गया कि 'वैवाहिक दुष्कर्म को अब तक मान्यता नहीं दी गई है। पुलिस स्टेशन कोतवाली, जबलपुर में दर्ज अपराध संख्या 377/2022 में एफआईआर और आवेदक (पति) के खिलाफ आपराधिक मुकदमा रद्द किया जाता है।' बता दें कि शख्स ने अपनी पत्नी की शिकायत पर अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता मनीष साहू ने याचिका में कहा था कि पत्नी ने उसके खिलाफ नरसिंहपुर में 24 अगस्त, 2022 को एक FIR दर्ज कराई है। शिकायत में पत्नी ने बताया था कि जब वह 2019 में शादी के बाद दूसरी बार अपने ससुराल गई थी तब पति ने उसके साथ आप्राकृतिक यौन संबंध बनाया था। इसके बाद उसने कई बार ऐसा किया। पति ने किसी को बताने पर पत्नी को तलाक की भी धमकी दी थी।