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Friday, 12 July 2024

प्राचार्य का आरोप- कलेक्टर फर्जीबाड़ा कर बने IAS, प्रशासनिक हलके में मचा हड़कंप, BJP नेता की वजह से बनी ये स्थिति


रफीक खान
मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले District Aagar Malwa में एक सरकारी स्कूल Governement School के प्राचार्य द्वारा दिए गए बेबाक बयान से प्रशासनिक हलके Administretive circle में हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई है। सरकारी स्कूल के इस प्राचार्य ने सीधे तौर पर जिले के कलेक्टर पर हमला बोलते हुए खुला आरोप लगाया है कि वह योग्य नहीं है, उनकी योग्यता और कार्यशैली दर्शाती है कि वह नीट NEET की तरह घपले घोटाले फर्जीबाड़ा कर IAS Officer की कुर्सी तक पहुंचे हैं। जिन्हें यह तक ज्ञान Knowledge नहीं है कि किसी सीनियर मोस्ट प्रिंसिपल Senior Most Principal को कार्यालय में अटैच Attech नहीं किया जा सकता। प्राचार्य का यह आरोप सरकार तक भी पहुंच गया है और सरकार भी इस स्थिति के चलते कुछ भी बोलने की स्थिति में फिलहाल नजर नहीं आ रही है। इस पूरे घटनाक्रम की वजह भारतीय जनता पार्टी का एक नेता, गांव का ही सरपंच है। जिस पर प्राचार्य द्वारा एफआईआर करवाने की बात के बाद पूरा मामला खड़ा हो गया।

कहा जाता है कि आगर मालवा जिला मुख्यालय से मात्र 8-10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पालखेड़ी गांव में हाई स्कूल प्राचार्य के सी मालवीय ने बच्चों को पीने का पानी उपलब्ध करने की मांग जिला प्रशासन तथा क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से की। बच्चों को पीने की पानी उपलब्ध करने के लिए किसी ने कोई गंभीरता या जिम्मेदारी नहीं दिखाई। जिसके चलते प्राचार्य के सी मालवीय ने गांव के सरपंच, भारतीय जनता पार्टी के नेता पर एफआईआर दर्ज करवाने की बात कह डाली। सरपंच को यह बात बुरी लगी और उन्होंने अपने क्षेत्र के विधायक को इस बात से अवगत कराया। विधायक को यह बात और ज्यादा नागवार गुजरी और उन्होंने प्रिंसिपल को सबक सिखाने का जिम्मा कलेक्टर को सौंप दिया। आगर मालवा जिले में पदस्थ कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने भी किसी तरह का कोई बुद्धि विवेक का परिचय नहीं दिया और उन्होंने सीधे प्राचार्य को उठाकर सुसनेर में अटैच कर दिया। इस घटना के बाद समूचे गांव द्वारा प्राचार्य को हटाने का पुरजोर विरोध किया गया और कलेक्टर ने 8 जुलाई को किए गए आदेश को दूसरे दिन 9 जुलाई को निरस्त कर दिया। आदेश निरस्त होने के बाद पूरे गांव के बच्चों और अभिभावकों ने खुशियां मनाई तथा प्राचार्य को KC मालवीय को घोड़े पर बैठाकर दूल्हे की तरह वापस स्कूल लाया गया। इस घटनाक्रम के बाद प्राचार्य ने बेहद अफसोस जताया तथा यह कहा कि जिले में पदस्थ कलेक्टर राघवेंद्र सिंह को किसी भी तरह का प्रशासनिक ज्ञान नहीं है। कलेक्टर होते हुए उन्हें यह नहीं मालूम की किस क्या करना है, हाई स्कूल के प्राचार्य को अटैच करने का अधिकार या निलंबित करने का अधिकार कलेक्टर को नहीं होता। वे वर्ष 2008 के सीनियर मोस्ट प्रिंसिपल है, जबकि कलेक्टर ने जिले में लेक्चरर स्तर के कर्मचारी को जिला शिक्षा अधिकारी District Education Officer का दायित्व दे रखा है। यह जानकारी भी उनको नहीं है। इससे लगता है कि कलेक्टर फर्जीबड़ा कर आईएएस बने हैं। सरकार को इसकी जांच करना चाहिए तथा ऐसे लोगों को कम से कम दोबारा ट्रेनिंग पर भेजो जाना चाहिए। प्राचार्य के इस बयान के बाद चौतरफा हड़कंप की स्थिति है तथा उनका यह बयान सोशल मीडिया पर भी जमकर वायरल हो रहा है। कलेक्टर स्वयं बैक फुट पर हैं और वह भी कुछ नहीं कह पा रहे हैं।