प्राइवेट ट्रस्ट मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, रिसीवर का आदेश कानूनी रूप से गलत - khabarupdateindia

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प्राइवेट ट्रस्ट मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला, रिसीवर का आदेश कानूनी रूप से गलत


रफीक खान
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की युगल पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि निजी जमीनों के मामले में बनाए गए ट्रस्ट पर सरकार द्वारा रिसीवर बैठाना कानूनी रूप से गलत है। सरकार इस तरह का आदेश अगर देती है तो उसे अवैध माना जाएगा। मध्य प्रदेश के नर्मदा पुरम जिले के एक मामले की सुनवाई करते हुए उक्त आदेश पारित किया गया है। Madhya Pradesh High Court's important decision in the private trust case, the receiver's order was legally wrong.

जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि वर्ष 1955 में श्री देव राम जानकी मंदिर (बड़िया वाला), पिपरिया ट्रस्ट की स्थापना मूल रूप से गुरु-शिष्य परंपरा के तहत की गई थी। ट्रस्ट की स्थापना बिना किसी सरकारी अनुदान या सार्वजनिक सहायता के की गई थी। ट्रस्ट की स्थापना महंत गोपाल दास ने की थी। स्व. सुखराम दास, गुरु गोपाल दास के शिष्य होने के नाते, यंगेश्वर दास को महंत बनाया गया।अपीलार्थी स्व. सुखराम दास के शिष्य हैं, जिन्होंने दो अगस्त 2006 को एक पंजीकृत वसीयत निष्पादित की थी, जिसमें अपीलकर्ता को अपना उत्तराधिकारी और ट्रस्ट का सर्वहाकार नियुक्त किया गया था। उक्त वसीयत के आधार पर अपीलकर्ता का नाम 2008 में सर्वहाकार के रूप में दर्ज किया गया था और वह तब से ट्रस्ट के मामलों और संपत्तियों का प्रबंधन कर रहे हैं। एक किराएदार ने उसे चुनौती देते हुए एसडीओ के समक्ष आवेदन दिया। एसडीओ ने तहसीलदार को ट्रस्ट का रिसीवर नियुक्त कर दिया। गुरू-शिष्य परंपरा के तहत अपीलार्थी ट्रस्ट का प्रबंधन ठीक से और पारदर्शी रूप से देख रहा है। कोर्ट ने कहा कि पब्लिक ट्रस्ट की धारा-9 और 26 के तहत आवेदन पब्लिक ट्रस्ट रजिस्ट्रार के समक्ष लंबित हैं, इसलिए मामले की जांच किए बिना रिसीवर नियुक्त नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में रिसीवर की नियुक्ति का आदेश कानूनी रूप से गलत है।हाईकोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत प्रतिपादित करते हुए कहा कि निजी जमीन पर बने ट्रस्ट पर सरकार रिसीवर की नियुक्ति नहीं कर सकती। ऐसा करना पूरी तरह अवैधानिक है। इस मत के साथ कलेक्टर नर्मदापुरम को छह माह के भीतर आवेदन का निराकरण करने के निर्देश दिए गए हैं। हाई कोर्ट ने कहा है कि आवेदन के निराकरण तक अपीलार्थी यंगेश्वर दास ट्रस्ट के प्रबंधक के रूप में कार्य करते रहेंगे। कोर्ट ने यह भी कहा कि कलेक्टर का निर्णय आने तक ट्रस्ट की जमीन खुर्दबुर्द नहीं की जाएगी और ट्रस्ट की आय का उचित रिकार्ड रखा जाएगा।