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मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ व राजस्थान के CM तय, दावेदारों को साधने व समझाइश की औपचारिकता के बाद होगी घोषणा





Rafique Khan

विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत के बाद मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान में नए मुख्यमंत्री के नाम तय हो गए हैं। अब दावेदारों को साधने व समझाइश की औपचारिकता के बाद जल्द ही सीएम के नामों की घोषणा कर दी जाएगी। यहां तक कि नए मुख्यमंत्रियो की शपथ के लिए भी तिथियां निर्धारित कर दी गई है। उधर दावेदारों की उठापटक अभी भी लगातार चरम पर नजर आ रही है।

पार्टी सूत्रों का दावा है कि भारतीय जनता पार्टी में किसी भी पद के लिए खींचतान का कोई स्थान नहीं है। संगठन तथा आरएसएस की रायशूमारी किसी भी निर्णय में अहम हिस्सा होती है। आरएसएस तथा भाजपा के बीच तीनों राज्यों के मुख्यमंत्री के लिए चर्चाएं हो चुकी हैं। किन को इन राज्यों की जिम्मेदारी दी जाना है, उनके नाम पर अच्छी तरह से विचार विमर्श किया जा चुका है। नाम की घोषणा में हो रही देर के पीछे सिर्फ एक कारण है कि तीनों ही राज्यों में दावेदारों की संख्या इस बार जरूरत से ज्यादा बढ़कर सामने आ गई है। पार्टी के भीतर कलह और उग्रता जैसी कोई स्थिति पैदा ना हो इसके लिए सभी को अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका दिया जा रहा है। पार्टी सूत्रों का यह भी कहना है कि इसके पहले विधानसभा चुनाव के प्रत्याशियों की सूची जारी होने के दौरान भी खींचतान व उठा पटक के नजारे देखने को मिले थे लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने अपने परंपरागत तरीकों के मुताबिक कहीं कोई समझौता नहीं किया यानी कि दबाव की राजनीति को कोई स्थान नहीं मिल पाया था।

तीनों राज्यों के लिए तीन-तीन पर्यवेक्षक

उधर भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए शुक्रवार को पर्यवेक्षकों को नियुक्त कर दिया। गुरुवार से ही ये खबर आ रही थी कि भाजपा शुक्रवार को पर्यवेक्षकों के नाम का ऐलान करेगी।राजस्थान के लिए भाजपा ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा सांसद सरोज पांडे विनोद तावड़े को नियुक्त किया है। वहीं, मध्य प्रदेश के लिए पार्टी ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, के लक्षमण, आशा लकड़ा और छत्तीसगढ़ के लिए केंद्रीय मंत्री सर्वानन्द सोनेवाल, कृषी मंत्री अर्जुन मुंडा और दुष्यंक गौतम को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा हैं।भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में मिली जीत के बाद उन्हीं चेहरों को मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया है, जो डबल इंजन सरकार फॉर्मूले में फिट बैठे। पार्टी का मानना है कि जनता ने तीनों राज्यों में जिस तरह से स्पष्ट बहुमत दिया है, उससे पार्टी पर काम करने का बहुत दबाव है। जनता की अपेक्षाएं तेजी से पूरी होंगी तभी तीनों राज्यों में 2024 की सभी लोकसभा सीटें जीतने का टारगेट पूरा हो सकेगा।

जोर आजमाइश सबाब पर

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान में मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाने के लिए दिग्गज नेताओं में जोर आजमाइश का दौरा मतगणना के दूसरे दिन से ही लगातार जारी है। जिस नेता की जहां-जहां तक पहुंच है, वह अपनी हिकमतों के साथ वहां पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह तथा भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से तो सभी मुलाकात कर ही रहे हैं। इसके अलावा भी दावेदार अपने-अपने रास्तों से जुगत भिड़ाने में लगे हुए हैं। मध्य प्रदेश में अकेले शिवराज सिंह चौहान एक ऐसे हैं जो दिल्ली की भाग दौड़ नहीं कर रहे हैं और उन्होंने स्पष्ट भी कर दिया है कि वह दिल्ली नहीं जाएंगे। उनके इस जुमले के भी सियासी हल्के में कई मायने निकाले जा रहे हैं। उधर पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर तथा प्रहलाद पटेल भी अपने कद के मुताबिक दिल्ली में लामबंदी कर रहे हैं। संगठन के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गी पूरी तरह मुखर होकर सामने है। उनके चहेते समर्थक विधायक रमेश मेंदोला खुले तौर पर पहले से ही मांग कर चुके हैं। राजस्थान में बालक नाथ से लेकर वसुंधरा राजे सिंधिया और सीपी जोशी से लेकर किरोड़ी लाल मीणा तक सभी अपने-अपने दांव पेच में व्यस्त है। हालांकि पार्टी के महत्वपूर्ण सूत्रों का दावा है कि ऊपरी तौर पर चल रहे इन सब घटनाक्रमों का पार्टी द्वारा लिए जा चुके निर्णय पर कोई असर पढ़ने वाला नहीं है।
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