CM डॉ. मोहन यादव का OSD बनकर लाखों की ठगी, ट्रांसफर करवाने व रुकवाने के अलावा कई काम करवाने का देते थे झांसा, पुलिस ने दो को किया गिरफ्तार - khabarupdateindia

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CM डॉ. मोहन यादव का OSD बनकर लाखों की ठगी, ट्रांसफर करवाने व रुकवाने के अलावा कई काम करवाने का देते थे झांसा, पुलिस ने दो को किया गिरफ्तार


Rafique Khan
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का ओएसडी बता कर ठगी करने वाले दो युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यह दोनों युवक लोगों को बड़े-बड़े काम करवाने का झांसा देते थे, खासतौर पर सरकारी कर्मचारी व अधिकारियों के ट्रांसफर करवाने और रुकवाने के नाम पर अब तक लाखों रुपए ऐंठ चुके हैं। ठगी की रकम हासिल करने के लिए आरोपी अपने बैंक अकाउंट का इस्तेमाल करने के बजाय अपने नजदीकी कियोस संचालकों के अकाउंट में पैसे डलवाते थे। मामूली सी रकम बतौर कमीशन देने के बाद कियोस संचालकों से नगद रुपए ले लेते थे। जांच पड़ताल के बाद पुलिस ने दोनों को दबोच लिया। जिनसे सघन पूछताछ की जा रही है।

इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार बताया जाता है कि शिक्षा विभाग में पदस्थ एक अधिकारी ने इस मामले की शिकायत जनवरी महीने में सायबर क्राइम ब्रांच में की थी। पीड़ित अधिकारी ने शिकायत में बताया कि स्वयं को मुख्यमंत्री का ओएसडी बताते हुए एक व्यक्ति ने उन्हें फोन किया और बताया कि आपका ट्रांसफर भोपाल से बाहर दूसरे जिले में हो गया है। यह ट्रांसफर रुकवाना चाहते हैं तो तीन लाख रुपये देने होंगे। अधिकारी को भोपाल से बाहर नहीं जाना था, इसलिए उन्होंने ट्रांसफर रुकवाने का निवेदन किया। इस पर फोन करने वाले ने अपने अधिकारी से बात कराई, जिसने डेढ़ लाख रुपये एक खाते में ट्रांसफर करवा लिए। उसके बाद एक लाख रुपये और ट्रांसफर करवाए। ढाई लाख रुपये देने के बाद अधिकारी को दोनों पर शंका हुई तो उन्होंने जानकारी हासिल की। तब पता चला कि उनका ट्रांसफर कहीं नहीं किया गया है। सायबर क्राइम ब्रांच ने तकनीकी जांच के बाद आरोपी सौरभ बिलगैया (32) और हरबल कुशवाह (23) दोनों निवासी पृथ्वीपुर जिला निवाड़ी को गिरफ्तार किया है। उनके पास से वारदात में प्रयुक्त मोबाइल फोन और सिमकार्ड जब्त हुए। आरोपी सौरभ अपने मोबाइल के वाट्सएप डीपी पर मध्यप्रदेश शासन का लोगो लगाए हुए था, ताकि लोग उसे शासकीय अधिकारी समझें। वह गूगल के माध्यम से शासकीय अधिकारी के नंबर खोजकर उन्हें फोन लगाता और ट्रांसफर होने पर रुकवाने अथवा करवाने का झांसा देता। बात में अपने साथी हरबल को अधिकारी बताकर बात कराता था। हरबल काम करने के लिए रुपयों की मांग करता था। पुलिस इस मामले में कियोस्क संचालकों की भूमिका की भी जांच कर रही है।