ओलों के साथ बरसे बादल, जबलपुर समेत आसपास के क्षेत्र में हुई ओलावृष्टि, किसानों को पहुंचा नुकसान - khabarupdateindia

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ओलों के साथ बरसे बादल, जबलपुर समेत आसपास के क्षेत्र में हुई ओलावृष्टि, किसानों को पहुंचा नुकसान



Rafique Khan
मध्य प्रदेश के जबलपुर जिला तथा उसके आसपास मंडला, सिवनी, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर आदि जिलों में रविवार को ओलावृष्टि के साथ बारिश हुई। कंचों के आकार के ओलों से किसानों को नुकसान पहुंचा है। अभी बादल लगातार उमड़-घुमड़ रहे हैं लेकिन राजस्व विभाग का अमला मैदान में उतर गया है।

पश्चिमी विक्षोभ के असर से एक बार फिर मौसम का मिजाज बदल गया है। रविवार को सुबह से ही उमड़-घुमड़ कर बादल बरसते रहे। सुबह नौ बजे सूर्यदेव ने दर्शन दिए पर कुछ ही देर बाद फिर बादल छा गए और 11:30 बजे गर्जना के साथ फिर वर्षा शुरू हो गई। जबलपुर सहित बरेला, बरगी सहित आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा के साथ ही ओलावृष्टि भी हुई। कंचे के आकार के ओले गिरे जिससे ठंड का असर बढ़ गया। ओलावृष्टि से किसानों की मटर, चना मसूर गेहूं की फसलों को बहुत नुकसान पहुंचने की संभावना है। 


पटवारी कृष्ण कुमार दहिया के अनुसार ग्राम कलादेही में भी ओले गिरे हैं। ग्राम सोहढ,बरबटी, नारलाई, डूंगरिया एवं अन्य ग्रामो में ओलावृष्टि से क्षति हुई है। पटवारी द्वारा राजस्व अमले के साथ ग्राम सरई और पिपरिया खुर्द के अलावा अन्य गांव का भी दौरा और निरीक्षण कृषि विभाग एवम राजस्व विभाग शुरू कर दिया गया है। ग्राम खपवारी, बंदरकोला, बसवा में भी ओलावृष्टि से फसलों को काफी नुकसान होना बताया जा रहा है।

साइकोनिक सकुर्लेशन सिस्टम की वजह से मौसम में बदलाव

साइकोनिक सकुर्लेशन सिस्टम की वजह मौसम में बदलाव देखने मिल रहा है। विपरीत दिशाओं की हवा (उत्तरी-दक्षिणी) का संयोजन होने के कारण बादल छा रहे वर्षा भी हो रही है। जबलपुर सुबह से दोपहर 12 बजे तक आधा इंच से ज्यादा वर्षा रिकार्ड गई है। 13 फरवरी तक मौसम ऐसा ही बना रहेगा। जबलपुर सहित संभाग के डिडौंरी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला सहित आस-पास के जिलों में वर्षा व ओलावृिष्ट की संभावना है। वर्षा और ओलावृष्टि से वातावरण में एक बार फिर ठंडक घुल गई है। गलाव वाली ठंड महसूस की जा रही है। मौसम की रंगत काे देखते हुए कहा जा रहा है रूक-रूक कर वर्षा का दौर जारी रहेगा। क्षेत्रीय मौसम कार्यालय के विज्ञानिक देवेंद्र तिवारी ने बताया कि वर्तमान में पूर्व मध्य अरब सागर कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों से लेकर मध्य महाराष्ट्र तक ट्रफ लाइन फैली हुई है। इसके प्रभाव से पूर्वी मध्यप्रदेश में नम हवा सक्रिय हो गई है।