SC ने जबलपुर के CGHS दवा केंद्र आवंटन के मामले में हस्तक्षेप से किया इनकार, 100 करोड़ से अधिक मूल्य के टेंडर निकाले गए थे संभाग के 10 केंद्रों के लिए, MP HC के आदेश विरुद्ध दायर अपील निरस्त - khabarupdateindia

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Saturday, 2 March 2024

SC ने जबलपुर के CGHS दवा केंद्र आवंटन के मामले में हस्तक्षेप से किया इनकार, 100 करोड़ से अधिक मूल्य के टेंडर निकाले गए थे संभाग के 10 केंद्रों के लिए, MP HC के आदेश विरुद्ध दायर अपील निरस्त



Rafique Khan

सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया ने जबलपुर के सीजीएचएस दवा केंद्र आवंटन के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। जबलपुर संभाग के 10 केंद्रों के लिए 100 करोड रुपए से अधिक मूल्य के टेंडर निकाले गए थे और दवा दुकानों का चयन किया गया था। इस पूरी प्रक्रिया को हाईकोर्ट में भी चुनौती दी गई थी लेकिन हाईकोर्ट ने जो आदेश पारित किया था, उसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। लंबी सुनवाई के बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर की गई अपील याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया।

इस संबंध में जानकारी देते हुए सुप्रीम कोर्ट के युवा अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने लम्बी सुनवाई के पश्चात विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी, जिसमें पिछले वर्ष हुए सी.जी.एच.एस. हॉस्पिटलो से संलग्नक दवा केंद्रों के आवंटनों को चुनौती दी गयी थी। सुको ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की युगल पीठ के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया, जिसने पूर्व में इन आवंटनों के सम्बन्ध में याचिका ख़ारिज की थी एवं कहा था की आपत्तिकर्ता केंद्र सरकार के समक्ष अपनी अर्जी दायर करे एवं सीधे रिट याचिका, बिना केंद्र सरकार को आवेदन दिए पोषणीय नहीं है। पिछले वर्ष जबलपुर संभाग के 10 केन्द्रों में दवा विक्रेताओं को चयनित करने हेतु 100 करोड़ से अधिक मूल्य का टेंडर निकाला गया था। निविदा पश्चात 3 दवा संचालकों को चयनित किया गया था, जिसके पश्चात उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल हुई थी, जिसमें चयनित दवा विक्रेताओं के चयन को चुनौती दी गयी थी एवं असफल आवेदक द्वारा आवेदन प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप लगाए गए थे। एमपी उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध अपीलीय याचिकाकर्ता कंचन मेडिकोस द्वारा सुको में अपील दायर की गयी, जिसमें सोमवार एवं शुक्रवार को विस्तृत सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता कंचन मेडिकोस की और से वरिष्ठ अधिवक्ता बलबीर सिंह उपस्थित हुए, केंद्र सरकार की ओर से ए.एस.जी. ऐश्वर्या भाटी एवं सफल चयनित दवा विक्रेताओं की और से अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने पैरवी की।

इस तरह होती है आवंटन की प्रक्रिया

गौरतलब है कि केंद्र शासन द्वारा जबलपुर संभाग के सी.जी.एच.एस. के पैनल पर नामांकित 25 से अधिक शासकीय एवं निजी हॉस्पिटलों में दवाओं क्रय करने हेतु हर तीन वर्ष में निविदाएं निकाली जाती है। 100 करोड़ से अधिक मुल्य की निविदा में दस से बारह केन्द्रो हेतु दो से तीन दवा विक्रेताओं को चयनित किया जाता है, जो की सी.जी.एच.एस. हॉस्पिटलों में दवा रियायती दरों पर विक्रय करे। पूर्व में जबलपुर के डिस्काउंट मेडिकोस द्वारा सबसे कम दरे प्रस्तावित करने पर केंद्र सरकार द्वारा उन्हें 5 केंद्र आवंटित कर दिए गए, जिसके विरुद्ध असफल निविदाकर्ता द्वारा उच्च न्यायालय में रिट याचिका के माध्यम से चुनौती दी।

न्यायालय के समक्ष यह दी गई दलीलें

उच्च न्यायालय की युगल पीठ ने रिट याचिका ख़ारिज करते हुए कहा था कि निविदा के अंतग्रत केंद्र सरकार को शिकायती अभ्यावेदन देने का विकल्प अप्पतिकर्ता के पास उपलब्ध है, जिस परिक्रया को बिना अपनाये ही रिट याचिका दायर कर दी गयी, जिस कारण वह पोषणीय नहीं है एवं रिट याचिका को खारिज कर दिया गया। सुको में अपीलकर्ता द्वारा यह आधार लिया गया कि बिना यह सत्यापित किये कि डिस्काउंट मेडिकोस को उद्यम प्रमाण पत्र प्राप्त है या नहीं, उसको दस में से पांच दवा केंद्रों का आवंटन कर दिया गया एवं अहर्ता प्रमाण पत्र बाद में निविदा के पश्चात केंद्र शासन के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसे स्वीकार कर लिया गया। चयनित निविदाकर्ता के पास आवश्यक अहर्ता ही नहीं थी, जिसको दरकिनार करते हुए केंद्र सरकार द्वारा इतना बड़ा ठेका सरकारी तौर पर आवंटित कर दिया गय। सफल निविदाकर्ता की और से अधिवक्ता सिद्धार्थ गुप्ता ने तर्क दिया कि उनके द्वारा सभी प्रमाण पत्र एवं अर्हता आवेदन की आखिरी तिथि पर जमा की गयी थी, जिसको सत्यापित करने के पश्चात ही केंद्र सरकार द्वारा उनको सफल निविदाकर्ता मानते हुए पांच केंद्र आवंटित किए। गुप्ता द्वारा यह भी तर्क दिए गया कि इस तरह की याचिकायें डाली इसलिए दायर की जा रही हैं की किसी भी प्रकार दवा का मार्केट पुराने लोगों के हाथ मे रहे। लगभग 50 मिनट की सुनवाई के पश्चात सुको ने उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने से मना करते हुए अपील याचिका खारिज कर दी। उन्होंने याचिकाकर्ता को न्यायालय का मूल्यवान समय बर्बाद करने पर नाराजगी व्यक्त की।