डॉक्टर है या व्यापारी? सेल लगा रहा है या शिविर? ऑफर देकर बुलाया जा रहा मरीजों को... "डेंटल हाउस" ने चिकित्सा क्षेत्र की सारी हदें की पार, CMHO ने भेजा अंतिम नोटिस - khabarupdateindia

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Sunday, 26 May 2024

डॉक्टर है या व्यापारी? सेल लगा रहा है या शिविर? ऑफर देकर बुलाया जा रहा मरीजों को... "डेंटल हाउस" ने चिकित्सा क्षेत्र की सारी हदें की पार, CMHO ने भेजा अंतिम नोटिस


रफीक खान
मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में इस समय एक डेंटिस्ट का व्यापरीकरण खूब चर्चाओं में है। दरअसल डॉक्टरी विधा में पहली बार इस तरह का बाजारूपन सामने आया है। यह डॉक्टर किसी भी धंधेगीर से कम नहीं है। शिविर लगा रहा है तो वह भी सेल की स्टाइल में?, मरीज को आकर्षित कर रहा है, छूट का ऑफर देकर? और बड़े-बड़े होर्डिंग में विज्ञापन किया जा रहा है। सामान्य सी बैचलर डिग्री BDS वाला यह डेंटिस्ट खुद को ऐसा प्रचारित और प्रसारित कर रहा है, जैसे कि यह दुनिया का सबसे विशेषज्ञ डॉक्टर है और जो इलाज दुनिया भर में कहीं नहीं हो सकता, वह यह करके दिखाएगा। इसका यह दावा अपने आप में भ्रामक तो है ही साथ ही जाहिर सी बात है कि यह सब क्यों कर रहा है? और इसमें खर्च होने वाली राशि को कई गुणा करके किससे वसूलेगा? यह बात न सिर्फ आम लोगों को खटकी बल्कि शहर भर के अन्य डेंटिस्ट को भी नागवार गुजरी और उन्होंने इसकी शिकायत DCI को भेज दी। जिस पर जबलपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी CMHO द्वारा डॉक्टर रोमिल सिंघाई को अंतिम नोटिस भेजा गया है।

उल्लेखनीय है कि डॉक्टरी पेशा समाज में बेहद इज्जत की नजरों से देखा जाता रहा है। लोग डॉक्टर को भगवान मानते रहे हैं। लूट खसोट की शुरू हुई प्रथा ने डॉक्टरों की प्रतिष्ठा को पहले ही काफी धूमिल कर रखा है लेकिन अब दंत रोग के क्षेत्र में बीडीएस करके बाजार में उतरे एक डॉक्टर ने इस तरह का काम किया है कि पूरा का पूरा डेंटिस्ट समाज शर्मिंदा सा महसूस कर रहा है। डेंटिस्ट ने खुद ही इस बात को माना है कि डॉक्टरी पेशा सेवा और परोपकार की राह पर चलने वाला एक माध्यम है। महंगाई के दौर में खर्चों को निकालना और मेंटेन करना एक अलग बात है लेकिन जिस तरह से रानीताल और रांझी में क्लिनिक संचालित करने वाले शहपुरा भिटोनी निवासी डॉक्टर रोमिल सिंह ने बाजारीकरण का नमूना पेश किया है, वह न सिर्फ निंदनीय है बल्कि समाज में बड़ी चिंता का विषय है। डॉक्टर आखिर मरीज को समझ क्या रहे हैं? इलाज के लिए इस तरह की नौटंकी? डिस्काउंट? ऑफर? ऐसा लगता है, जैसे डॉक्टर ने सिर्फ यह छोड़ दिया है कि "पहले आओ, पहले पाओ" यानी कि जो बीमार नहीं है वह भी आ जाए और अपना इलाज करा जाए। डॉक्टर द्वारा अपनी दुकान को चलाने के लिए जिस-जिस तरह के हथकंडों को अपनाया गया, उसे देखकर जिम्मेदार डेंटल काउंसिल आफ इंडिया भी हतप्रभ है क्योंकि डेंटल काउंसिल आफ इंडिया के पास में पूरे देश भर से शिकायतें आती है लेकिन इस तरह की शिकायत पहली बार सामने आई है।

2 साल से चल रही है यह नौटंकी


बताया जाता है कि 2 साल पूर्व जबलपुर के डेंटिस्ट द्वारा एक शिकायत अपने असोसिएशन को भेजी गई थी। इंडियन डेंटल एसोसिएशन IDA की इकाई ने यह शिकायत प्रदेश को भेजी और फिर प्रदेश के माध्यम से शिकायत डेंटल काउंसिल आफ इंडिया DCI के पास भेजी गई। डेंटल काउंसिल आफ इंडिया ने पांच सदस्यिय एक टीम गठित कर जांच के लिए जबलपुर भेजी। सीएमएचओ कार्यालय में आकर उक्त समिति द्वारा जांच की गई और तमाम तरह की आरोप और शिकायतों को सही पाया गया। डॉक्टर रोमिल सिंघाई को तलब किया गया और उसने माफी मांग कर कमेटी से छुटकारा पा लिया। हालांकि इस दौरान डॉक्टर सिंघई ने आश्वस्त किया था कि वह अब इस तरह का कोई कृत्य नहीं करेगा, जो इंडियन डेंटल डेंटल काउंसिल आफ इंडिया के निर्धारित मापदंडों के खिलाफ होगा। इसके बावजूद डॉक्टर सिंघई ने अपने हथकंडों पर कोई अंकुश नहीं लगाया। वह लगातार व्यापरीकरण की राह पर ही चलता रहा। कहा जा रहा है कि कि वह सामान्य बीडीएस BDS डिग्रीधारी है और उसके पास कोई भी विशेषज्ञता नहीं है, दूसरे शहरों से वह मास्टर डिग्री वाले डॉक्टरो का हवाला देकर लोगों को भ्रमित कर रहा है। अगर सही मायने में देखा जाए तो यह सिर्फ डेंटल काउंसिल आफ इंडिया के निर्धारित मापदंडों का अपराध नहीं है बल्कि भारतीय दंड विधान की धारा 420 के तहत भी आता है। क्योंकि वह आम जनों से सीधे तौर पर धोखाधड़ी भी कर रहा है। अगर इंडियन डेंटल एसोसिएशन ने ठान लिया तो डॉक्टर के खिलाफ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज हो सकता है और न सिर्फ उसका लाइसेंस रद्द होगा बल्कि डिग्री भी खतरे में आ सकती है।

यह सब आपत्तिजनक है और पेशे के खिलाफ भी

बताया जाता है कि दंत चिकित्सक सिंघई द्वारा डेंटिस्ट कोड आफ एथिक्स रेग्युलेशन 2024 का उल्लंघन किया जा रहा है। यह शिकायत दंत रोग पीड़ितों को ब्रेसेस, इम्प्लांट पर 25 प्रतिशत की छूट और निशुल्क जांच एवं परामर्श जैसे भ्रामक दावों से संबंधित है। जो कि पूरी तरह से चिकित्सा सेवा क्षेत्र में आपत्तिजनक माने जाते हैं और पेशे में उसूलों के खिलाफ भी हैं। सीएमएचओ द्वारा इस तरह की सभी शिकायतों के आधार पर लगभग अलावा सात बिंदु पर तीन दिन में स्पष्टीकरण मां
इस संबंध में सीएमएचओ डॉक्टर संजय मिश्रा ने बताया कि दंत चिकित्सकों के एक प्रतिनिधि मंडल ने शिकायती पत्र सौंपा है। इसमें अनैतिक प्रचार-प्रचार संबंधी शिकायत है। मामले में संबंधित दंत चिकित्सक को स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने निर्देश दिया है। जिन्हें डेंटल एसोसिएशन के दल ने जांच में अनैतिक और भ्रामक माना है। इसमें अनुचित व्यवसायिक लाभ, अंसगत विज्ञापन, उपचार में छूट, इम्प्लांटोलाजिस्ट होने के दावे से संबंधित बिंदु सम्मिलित है। समस्त बिंदुओं पर तीन दिन के अंदर स्वास्थ्य विभाग को स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। संतोषजनक उत्तर नहीं होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

यह तीन नेता कौन है, जो देना चाहते हैं संरक्षण

इस पूरे घटनाक्रम में सत्तारूढ़ पार्टी के तीन नेता बड़े चर्चित हो रहे हैं। इन नेताओं ने न सिर्फ डॉक्टर रोमिल सिंघाई की क्लीनिक में जाकर उसकी वाहवाही की बल्कि जब वह चिकित्सा सेवा क्षेत्र के नियम कायदों को तार-तार कर रहा है तब भी उसका संरक्षण करने में लगे हुए हैं। यहां तक की मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी पर भी दबाव डाला जा रहा है कि वह उसके खिलाफ कोई कार्रवाई न करें। सीएमएचओ अगर किसी तरह से डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करने में पीछे हटे तो यह बात पूरी तरह से स्पष्ट हो जाएगी की नेताओं ने का दबाव काम कर गया हालांकि तीनों नेतागढ़ फिलहाल इस बात को भूल बैठे हैं कि प्रदेश में इस समय डॉक्टर मोहन यादव की सरकार है और अगर उसे जरा भी पता चल गया कि डॉक्टर सिंघई की कार्यप्रणाली को न सिर्फ इंडिय न डेंटल एसोसिएशन बल्कि समूचा चिकित्सा जगत थू-थू कर रहा है, तब फिर नेताओं की बाट लगने में भी देर नहीं लगेगी। इसलिए बेहतर तो यही होगा कि नेता गणों की थैली में जो आ गया है, अब उसे चुपचाप लेकर बैठ जाएं, वरना डॉक्टर के साथ उनका भी कल्याण हो जाएगा।

इनका कहना है कि...

चिकित्सकीय पेशा सेवा के क्षेत्र में आता है। इसके संचालन के लिए मापदंडों का निर्धारण है। विज्ञापन के लिए भी सीमाएं हैं और कम से कम भ्रामक गारंटी और ऑफर जैसा तो कोई स्थान इस क्षेत्र में नहीं है। 2 वर्ष पूर्व भी डॉक्टर सिंघई पर कार्रवाई के लिए डीसीआई की टीम आई थी, लेकिन माफी की आड़ में वह बच गए थे। उनके द्वारा यह कृत्य लगातार जारी है और इस पर कार्रवाई होना अतिआवश्यक है।

डॉ. अंशुल गुलाटी,
सचिव, इंडियन डेंटल एसोसिएशन जबलपुर 

डॉक्टर सिंघई द्वारा जिस तरह के कारनामे पेश किया जा रहे हैं, यह किसी तरह का कंपटीशन नहीं है बल्कि चिकित्सा जैसे पुण्य कार्य को बाजारू बनाने की कोशिश है। डॉक्टर के स्तर गिराने का यह एक तरह से दृश्य है। डॉक्टर सिंघई को सीएमएचओ द्वारा नोटिस दिया गय इंडियन डेंटल एसोसिएशन का न सिर्फ प्रयास है बल्कि यह संकल्प भी है कि वह निर्धारित मापदंडों और आदर्श आचरण संहिता के तहत ही डेंटिस्ट के पेशे को संचालित करवाए। हर हाल में डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई होना चाहिए ताकि चिकित्सा सेवा क्षेत्र में इस तरह की हरकतों को बढ़ावा ना मिल पाए।

डॉ. अनिमेष अग्रवाल,
अध्यक्ष इंडियन डेंटल एसोसिएशन जबलपुर इकाई


डॉक्टर रोमिल सिंघाई को नोटिस दिया गया है। इस नोटिस के जरिए उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया गया है। हालांकि यह बात भी पूरी तरह से स्पष्ट है कि पूर्व में भी उनके द्वारा इस तरह के कृत्य की शिकायत हुई थी, उन शिकायतों को सही माना गया था। वर्तमान में भी शिकायतकर्ताओं द्वारा जो साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं, वह आपत्तिजनक है और निर्धारित मापडंडों के खिलाफ है।

डॉ. संजय मिश्रा,
सीएमएचओ तथा क्षेत्रीय संचालक लोक स्वास्थ्य विभाग जबलपुर

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