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Monday, 14 July 2025

हिंदू संगठनों की चेतावनी के बीच कलेक्टर का एक्शन, SDM मरावी रांझी से हटाए गए, ऋषभ जैन को दायित्व



रफीक खान
मध्य प्रदेश के जबलपुर में स्थित रांझी मढ़ई मस्जिद मामले की जांच, उस पर हिंदू संगठनों की कथित आपत्ति और महाआंदोलन की चेतावनी के बीच एसडीएम आर एस मरावी को हटा दिया गया है। कलेक्टर दीपक सक्सेना द्वारा कार्यालयिन समय शुरू होते ही सबसे पहले आदेश जारी कर संयुक्त कलेक्टर ऋषभ जैन को रांझी एसडीएम का दायित्व सौंप दिया है। एसडीएम मरावी पर की गई इस कार्रवाई के पीछे कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में उल्लेख तो नहीं किया गया है लेकिन माना यही जा रहा है कि हिंदू संगठनों के दबाव के चलते कलेक्टर को यह कार्रवाई करने के लिए विवश होना पड़ा। गौरतलब है कि रांझी एसडीएम ने इस पूरे मामले की जांच की, इसका खुलासा किया, कलेक्टर को प्रतिवेदन सौंपा और कलेक्टर के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर यह जानकारी सार्वजनिक की गई। बाद में उसे अचानक डिलीट कर दिया गया और सोमवार को एसडीएम मरावी को हटाने की कार्रवाई सामने आ गई। चूंकि मामला दो समुदायों से जुड़ा हुआ है, इसलिए पुलिस और प्रशासन इसमें लगातार अति संवेदनशीलता बरत रहा है। Collector's action amid warnings from Hindu organizations, SDM Marawi removed from Ranjhi, Rishabh Jain given the responsibility

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विदित हो कि बजरंग दल एवं विश्व हिंदू परिषद द्वारा शिकायत की गई थी कि मस्जिद का निर्माण गायत्री बाल मंदिर संस्था की भूमि पर किया गया है, अतः विधिवत सीमांकन कर मस्जिद का निर्माण हटाया जाए। शिकायत के संदर्भ में प्रकरण में मौका एवं राजस्व अभिलेखों की जांच तथा विस्तृत सीमांकन के आधार पर वस्तुस्तिथि के संबंध में उन्‍होंने कहा कि उक्त मस्जिद का निर्माण वर्ष 1985 में किया गया है। इस प्रकार उक्त मस्जिद, मंदिर को मस्जिद में परिवर्तित करने संबंधी किसी ऐतिहासिक विवाद से संबंधित नहीं है। विवाद की शुरुआत मस्जिद में प्रथम तल पर अतिरिक्त निर्माण कार्य प्रारंभ किए जाने की वजह से हुई। बंदोबस्त वर्ष 1990-91 के पूर्व मूल खसरा नंबर 326 था, जिसके कुल 8 बटांक थे। 2 बटांक 326/6 रकवा 0.008 हे. एवं 326/7 रकवा 0.014 हे. सैफुद्दीन के नाम दर्ज था। बंदोबस्त के समय वर्ष 1990 में उक्त भूमि पर मौके पर मस्जिद निर्मित थी, लेकिन तत्समय नक़्शे में बटांकन नहीं हुआ था। एक बटांक ख.नं. 326/4 रकवा 0.022 हे. भूमि गायत्री बाल मंदिर विद्यालय के नाम दर्ज था। बंदोबस्त के दौरान उक्त मूल खसरा नंबर 326 के 8 बटांकों के नवीन नंबर 163 से 170 तक बने। किंतु उक्त सर्वे नंबर मौके पर कब्जे के हिसाब से नहीं बनाए गए। उक्त नवीन सर्वे नंबरों के रकबे भी त्रुटिपूर्ण दर्ज किए गए। उन्‍होंने कहा कि गायत्री बाल मंदिर संस्था का नवीन नंबर 169 बना। जो बंदोबस्त के पूर्व बटांक नंबर 326/4 था। तत्समय मौके पर स्थिति स्पष्ट नहीं थी और न ही वर्तमान में मौके पर उक्त संस्था का कोई कब्जा है। बंदोबस्त के दौरान बनाये गए नक्शे में नवीन नंबर 169 को जिस स्थान पर त्रुटिपूर्ण दर्शित किया गया, वहां पर मौके में पूर्व से ही मस्जिद बनी थी। मौके पर पुराने खसरा नंबर 326 के किसी भी बटांक में उक्त संस्था का कब्जा होना नही पाया गया है। मौके पर कभी मंदिर निर्मित होने या मंदिर की भूमि पर मस्जिद निर्मित होने जैसा कोई प्रमाण नहीं पाया गया है। जांच में यह सिद्ध पाया गया है कि मस्जिद का निर्माण बंदोबस्त के पूर्व उनके क़ब्ज़े और मालिकी हक़ की भूमि पर ही हुआ है। लेकिन बंदोबस्त में नवीन सर्वे नंबर और नक़्शा क़ब्ज़े के अनुसार निर्मित नहीं किए गए, जिसकी वजह से वर्तमान में विवाद की स्तिथि निर्मित हुई है। बंदोबस्त की उक्त नक़्शा त्रुटि सुधार के लिए न्यायालय कलेक्टर जबलपुर में प्रकरण प्रस्तुत किया गया है। नक़्शा त्रुटि सुधार के लिए कलेक्टर न्यायालय में हितबद्ध/प्रभावित पक्षकारों की सुनवाई कारवाई प्रचलित है। प्रकरण में गायत्री बाल मंदिर संस्था, जिनके नाम पर नवीन नंबर 169 रकवा 0.02 हे. (2152 वर्गफुट) दर्ज है, के लिए अभी तक कोई भी दावाकर्ता/पक्षकार उपस्थित नहीं हुए हैं। एसडीएम श्री मरावी ने कहा कि प्रकरण में बन्दोबस्त की त्रुटि का सुधार कर वर्तमान कब्जे के अनुसार नक्शा और बटांक नंबर निर्मित करने की कार्यवाही की जाएगी। मस्जिद का निर्माण बंदोबस्त के पूर्व उनके क़ब्ज़े और मालिकी हक़ की भूमि पर ही हुआ है। अतः उसे हटाने की प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। मस्जिद के संबद्ध में आंदोलनकारियों को वस्तुस्तिथि से अवगत करा दिया गया है। आंदोलनकारियों को विधि-विरुद्ध कार्यवाही कर कानून व्यवस्था की स्तिथि नहीं बिगाड़ने के लिए कई बार समझाइश दी जा चुकी है।