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Friday, 11 July 2025

जस्टिसों की सलाह से लग सकता है चुनाव आयोग की शक्तियों पर अंकुश, अब केंद्र सरकार को सोचना होगा



रफीक खान
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूर्ण ने चुनाव आयोग को बेलगाम ताकत नहीं दिए जाने की जोरदार पेशकश की। उनके साथ जस्टिस जेएस खेहर ने भी यही बात रखी। दोनों ही पूर्व न्यायाधीशों ने एक देश एक चुनाव पर 129 में संशोधन बिल के लिए ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमिटी JPC की बैठक के दौरान यह मंशा जाहिर की। उन्होंने केंद्र सरकार को सलाह दी कि निर्वाचित सरकार का 5 साल का कार्यकाल सुनिश्चित करने पर भी विचार किया जाना चाहिए और चुनाव आयोग को खुला बिल्कुल भी छोड़ना उचित नहीं है। The powers of the Election Commission may be curbed with the advice of the judges, now the central government will have to think

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कहा जाता है कि शुक्रवार को संसद भवन में हुई इस मीटिंग में पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ (DY Chandrachud) और जस्टिस जगदीश सिंह खेहर ने भी हिस्सा लिया। दोनों पूर्व सीजेआई ने इस बात पर जोर दिया कि भारत के चुनाव आयोग को एक राष्ट्र, एक चुनाव प्रणाली को लागू करने में अनियंत्रित शक्तियां नहीं दी जानी चाहिए। इससे पहले पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने भी प्रस्तावित संविधान संशोधन कानून में चुनाव निकाय को दी गई "व्यापक शक्तियों" पर सवाल उठाया था। डीवाई चंद्रचूड़ और जेएस खेहर ने संसदीय समिति को सुझाव दिया कि चुनावों के संचालन पर एक "निगरानी तंत्र" होना चाहिए। देश के दो अन्य पूर्व चीफ जस्टिस यूयू ललित और रंजन गोगोई भी समिति के समक्ष उपस्थित हो चुके हैं। हालांकि दोनों ने एक साथ चुनावों की संवैधानिकता पर सवाल नहीं उठाया, लेकिन उन्होंने विधेयक के कुछ पहलुओं पर सवाल उठाए और सुझाव दिए थे। पूर्व मुख्य न्यायाधीशों के सुझावों पर पीपी चौधरी ने कहा, "जहां तक चुनाव आयोग के प्रावधान का सवाल है, अगर हमें लगता है कि विधेयक में संशोधन की जरूरत है तो हम इसमें संशोधन करेंगे।"