रफीक खान
मध्य प्रदेश के जबलपुर में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो के निशाने पर आए उस समय के आरटीओ संतोष पाल के मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय ED ने एंट्री मार दी है। दरअसल राज्य सरकार से जुगाड़ भिड़ा कर संतोष पाल ने पहले अपना निलंबन बहाल कराया, उसके बाद उपायुक्त परिवहन कार्यालय में पदस्थापना कराई और फिर जबलपुर में ही बतौर एआरटीओ पोस्टिंग करवा ली। इसके अलावा जबलपुर, रीवा, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर के अतिरिक्त चार्ज में भी संतोष पाल की परिवहन विभाग और राज्य सरकार से जबरदस्त सेटिंग चली आ रही है। ED enters amid a deal with the state government, high chances of more secrets of Santosh Pal being exposed
जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि संतोष पाल व उसकी पत्नी सीनियर क्लर्क रेखा पाल की आय से अधिक आमदनी के मामले को अब परिवर्तन निदेशालय देखेगी। संतोष पॉल पर करीब 3 साल पहले ईओडब्ल्यू की जबलपुर ईकाई ने दबिश देकर आय से अधिक संपत्ति का खुलासा किया था। ईडी ने यह कार्यवाही आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) भोपाल द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत संतोष पॉल और रेखा पॉल के विरुद्ध दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच के बाद की है। संपत्ति जब्ती पीएमएलए 2002 के प्रावधान के आधार पर की है। इन पर आय के घोषित सोर्स से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप था। ईडी की जांच में यह पता चला कि इन लोक सेवकों ने जांच अवधि के दौरान अपनी वैध आय से काफी अधिक चल और अचल संपत्ति अर्जित की थी। 73.26 लाख रुपए की सत्यापित वैध आय के साथ संतोष पॉल और रेखा पॉल ने लगभग 4.80 करोड़ रुपए की संपत्ति अर्जित की और खर्च किए। जिसके चलते लगभग 4.06 करोड़ रुपए की अनुपातहीन संपत्ति बन गई। जांच में ऋण की ईएमआई भुगतान से ठीक पहले उनके बैंक खातों में सुनियोजित तरीके से बार-.बार नकद जमा किए जाने का पता चला, जिससे खुलासा हुआ कि इन्होंने बेहिसाब नकदी को बैंकिंग प्रणाली में शामिल किया था। जबलपुर जिले में स्थित आवासीय मकान, आवासीय भूखंड, कृषि भूमि व व्यवसायिक दुकानें शामिल हैं, जिन्हें आय के रूप में अस्थायी रूप से जब्त किया गया है। ऐसी संभावना है कि ईओडब्ल्यू की जांच में जो भी कमियां छोड़ी गई है पीएफ उनका पता लगाकर और व्यापक में करने पर कार्रवाई कर सकती है।
