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Wednesday, 28 January 2026

पहले दुर्घटना, फिर हिट एंड रन और अब सामने आई खौफनाक मर्डर मिस्ट्री, एसआईटी करेगी पूरे मामले की जांच


रफीक खान
मध्य प्रदेश के विंध्याचल में शहडोल से भारतीय जनता पार्टी सांसद हिमाद्री सिंह की महिला असिस्टेंट और चर्चित भाजपा नेत्री रोशनी शुक्ला को दो बोलेरो जीपों से कुचलकर मार डाला गया। शुरुआत में यह घटना महज दुर्घटना बताई गई। बाद में इसे हिट एंड रन कहा गया, पर अब यह मामला खौफनाक मर्डर मिस्ट्री के रूप में सामने आया है। पुलिस भी इस मामले को लेकर बेहद गंभीर हो गई है। पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन भी कर दिया गया है। अब एसआईटी ही घटना की जांच करेगी। First an accident, then a hit-and-run, and now a horrific murder mystery has emerged; the SIT will investigate the entire case.

जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि परिवार, प्रत्यक्षदर्शियों और घटनास्थल की तस्वीरें एक ऐसी कहानी बयां करती हैं, जिसे सुनकर रूह कांप जाती है। रोशनी को पहले एक बोलेरो से टक्कर मारी गई, फिर दूसरी बोलेरो ने आगे-पीछे करते हुए उसे बार-बार कुचला। जब तक लोग मौके पर पहुंचे, तब तक उसका शरीर लगभग क्षत-विक्षत हो चुका था। यह महज़ हादसा नहीं था, बल्कि निर्मम हत्या की तरह दिख रहा है। मकर संक्रांति के दिन रोशनी शुक्ला बस से उतरकर घर की ओर बढ़ रही थीं। उन्होंने कुछ देर पहले ही भाई को फोन कर बताया था कि वह पहुंचने वाली हैं। अंधेरा था, सड़क सुनसान थी। तभी दो बोलेरो गाड़ियां वहां पहले से मौजूद थीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जैसे ही रोशनी आगे बढ़ीं, उन गाड़ियों में बैठे युवकों ने उनसे बदतमीजी की। रोशनी ने विरोध किया—यही उसकी सबसे बड़ी गलती बन गई। गाड़ियां उसके पीछे चल पड़ीं। कुछ दूरी पर एक बोलेरो आगे और दूसरी पीछे आ गई। रोशनी जान बचाकर दौड़ी, लेकिन कुछ ही पलों में वह शिकार बन चुकी थी। पहले बोलेरो ने उसे टक्कर मारकर गिराया। इसके बाद दूसरी बोलेरो ने उसे कुचलते हुए आगे बढ़ी। रोशनी चीखती रही, मदद की गुहार लगाती रही। ड्राइवर आगे-पीछे करते हुए उसे रौंदता रहा। अंततः गाड़ी पलट गई और रोशनी उसके नीचे दब गई। करीब 15 लोगों ने 45 मिनट की मशक्कत के बाद बांस की बल्लियों से गाड़ी उठाकर उसे बाहर निकाला। उसकी रीढ़ टूट चुकी थी, पैर कई जगह से चूर-चूर थे, सिर और पेट पर गहरे घाव थे। पिता शिवाकांत शुक्ला का कहना है कि वह देश की सेवा करना चाहती थी, राजनीति में आगे बढ़ रही थी लेकिन किसी को यह मंजूर नहीं था। इस मामले ने पूरे सिस्टम को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। वहीं भारतीय जनता पार्टी की सांसद से लेकर संगठन के पदाधिकारी तक की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है।