राहत कार्य से ज्यादा लाव लश्कर तो कैलाश विजयवर्गीय को घुमाने में लगा है, मौतों के लिए सिर्फ अफसर जिम्मेदार क्यों? - khabarupdateindia

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राहत कार्य से ज्यादा लाव लश्कर तो कैलाश विजयवर्गीय को घुमाने में लगा है, मौतों के लिए सिर्फ अफसर जिम्मेदार क्यों?


रफीक खान
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देश पर नगर निगम इंदौर के आयुक्त पद पर दिलीप यादव के स्थान पर आईएएस अधिकारी क्षितिज सिंघल की पदस्थापना की गई है। क्षितिज सिंघल वर्तमान में मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में बतौर प्रबंध संचालक अपनी सेवाएं दे रहे थे। अब इंदौर नगर निगम की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई है। शुक्रवार के दिन से शुरू हुआ मुख्यमंत्री का एक्शन मोड बरकरार है लेकिन इस बीच एक बड़ा सवाल यह है कि क्या दूषित पानी से हुई मौतों की जिम्मेदारी सिर्फ अधिकारियों के सिर पर ही डाली जाना उचित है? अधिकारियों को आदेश, निर्देश और उंगलियों पर नाचने वाले नेताओं को क्यों बख्शा जा रहा है? हालांकि इस सवाल का जवाब बहुत कठिन है। More than relief work, the entourage is busy taking Kailash Vijayvargiya around, why are only the officers responsible for the deaths?

जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से लोगों की मौत के बाद क्षितिज सिंघल नए आयुक्त होंगे। वे वर्ष 2014 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वर्तमान में सिंघल मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे। दिलीप यादव के साथ ही अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और निगम के जल कार्य विभाग में पिछले 12 सालों से जमे प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया था। सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इंदौर में दूषित पेयजल से हुई दुखद घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की गई है। प्रदेश के अन्य स्थानों में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए समयबद्ध सुधारात्मक कार्यक्रम तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी 16 नगर निगमों के महापौर, आयुक्त, जिला कलेक्टर और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर पूरे प्रदेश की समीक्षा की गई है। इस बीच अनेक वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कार से उतरते और बैठते नजर आ रहे हैं। मीडिया के लोग अलग-अलग सवाल कर रहे हैं। सवाल बहुत कठिन नहीं है, आसान है लेकिन कैलाश विजयवर्गीय जहां खुद उन सवालों से अपने आप को छुपा रहे हैं तो वही बड़ा सरकारी लाव लश्कर उन्हें मीडिया से बचाने में लगा हुआ है। दृश्य को देखकर तो ऐसा लगता है, जैसे कि राहत कार्य से कहीं ज्यादा शक्ति मंत्री जी को मीडिया से बचाने में लगाई जा रही है।