शंकराचार्य V/S उत्तर प्रदेश सरकार, BJP के सच्चे सनातनी नेताओं को भी नागवार गुजरा है संतों का अपमान - khabarupdateindia

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शंकराचार्य V/S उत्तर प्रदेश सरकार, BJP के सच्चे सनातनी नेताओं को भी नागवार गुजरा है संतों का अपमान


रफीक खान
उत्तर प्रदेश के माघ मेला में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके साथ गई टोली के साथ की गई अभद्रता, अपमान और मारपीट से राज्य सरकार तथा मुख्यमंत्री की जमकर आलोचना हो रही है। यहां तक कि अपमान को लेकर कुछ लोगों ने नौकरी से इस्तीफा तक दे दिया है। सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल किया जा रहा है। वहीं भारतीय जनता पार्टी के सच्चे सनातनी नेता भी मुखर हो गए हैं। फायर ब्रांड नेत्री, पूर्व मुख्यमंत्री तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने तो सीधे तौर पर कह दिया है कि सरकार के प्रशासनिक अधिकारी कौन होते हैं? जो शंकराचार्य के असली और नकली होने की बात कर रहे हैं। अधिकारियों को अपने दायरे और मर्यादा में रहना चाहिए। उन्होंने यह भी अपेक्षा की है कि जल्द ही इस मामले का सामंजस्य के साथ समाधान होना चाहिए। Shankaracharya V/S Uttar Pradesh Government, even the true Sanatani leaders of BJP have found the insult of saints objectionable.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कहा जाता है कि मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेत्री उमा भारती ने इस पूरे घटनाक्रम पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से अपनी बेबाक राय रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य जैसे पद की गरिमा और मर्यादा सर्वोपरि है और प्रशासन को इसमें हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए। अपनी पोस्ट में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसी से उनके 'शंकराचार्य' होने का प्रमाण मांगना धार्मिक मर्यादाओं का खुला उल्लंघन है। उन्होंने उत्तर प्रदेश प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए लिखा कि ऐसा करके प्रशासन ने अपनी 'लक्ष्मण रेखा' पार की है। उमा भारती के अनुसार, किसी के शंकराचार्य होने की प्रामाणिकता की जांच करने का अधिकार केवल अन्य शंकराचार्य या विद्वत परिषद को ही है, किसी सरकारी निकाय या प्रशासन को नहीं। पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने रुख को साफ करते हुए कहा कि वह इस बात पर अडिग हैं कि प्रशासन को कानून-व्यवस्था पर पूरी सख्ती से नियंत्रण करना चाहिए, लेकिन धार्मिक पदों की शुचिता का ध्यान रखना भी जरूरी है। उधर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थक भी सोशल मीडिया में पीछे नहीं है और वे शंकराचार्य तथा उनका समर्थन करने वालों प्रति तीखा हमला कर रहे हैं। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम से सनातन के पैरोकार शंकराचार्य के मान सम्मान को काफी ठेस पहुंच रही है।