पूरे देश में हो रहा बिना किसी नेतृत्व के विरोध प्रदर्शन, जातिगत भेदभाव रुकेगा या बढ़ेगा? नया विवाद हो गया खड़ा - khabarupdateindia

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पूरे देश में हो रहा बिना किसी नेतृत्व के विरोध प्रदर्शन, जातिगत भेदभाव रुकेगा या बढ़ेगा? नया विवाद हो गया खड़ा


रफीक खान
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी कि यूजीसी की ओर से ले गए समता विनियम 2026 पर रोक लगा दी है। यूजीसी के इन नए नियमों के खिलाफ पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहा है। बिना किसी नेतृत्व के चारों तरफ कानून पर सवाल उठाए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार को निर्देशित किया है। Unled protests are taking place across the country. Will caste discrimination stop or increase? A new controversy has arisen.

ऐसा कहा जा रहा है कि उच्च शिक्षा नियंत्रक शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को खत्म करने के मकसद से लाए गए नियमों को लेकर सरकार विवादों में घिर गई। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने फिलहाल यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि भेदभाव की परिभाषा और ज्यादा समावेशी होनी चाहिए। 2026 के रेगुलेशन में भेदभाव की भाषा अस्पष्ट है। कोर्ट ने कहा कि उसे यह देखना होगा कि नए नियम समानता के अधिकार के हिसाब से सही हैं या नहीं। इसी के साथ सर्वोच्च न्यायालय ने 2012 के यूजीसी नियमों के लागू रहने की बात कही। रोहित वेमुला और पायल तड़वी की कथित जातिगत भेदभाव के कारण हुए हत्या के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी को ऐसे मामलों से निपटने के लिए नियम बनाने के आदेश दिए थे। 13 जनवरी 2026 को यूजीसी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए 'समता विनियम 2026' लेकर आई। इसमें समान्य वर्ग के लोगों द्वारा एससी, एसटी के बाद अब ओबीसी के साथ भी जातिगत भेदभाव करने पर कड़े प्रवाधान बनाए गए हैं।