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Thursday, 29 January 2026

कौन संभालेगा विरासत?, अजित पवार की अचानक मौत के बाद मराठियों के साथ सियासत के नए समीकरण बनने लगे


रफीक खान
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और मराठियों के बीच अपना बड़ा प्रभाव रखने वाले अजीत पवार के अचानक चले जाने से न सिर्फ उनकी अपनी पार्टी और खेमे को नुकसान है बल्कि महाराष्ट्र में सियासी समीकरण बनने लगे हैं। महाराष्ट्र और बासमती का पावर हाउस किसके हाथ में होगा? किसके यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। चाचा शरद पवार के पास खोई हुई ताकत फिर से वापस आएगी या फिर अजित पवार के दोस्त प्रफुल्ल पटेल के पास शिफ्ट होगी या अजीत पवार के बेटे-बेटी, पत्नी या भतीजे के पास? यह चर्चा सियासत की गलियारों में सरगर्म हो उठी है। Who will inherit the legacy? After Ajit Pawar's sudden death, new political equations with the Marathas are emerging.

अजित पवार का चार्टर प्लेन खराब मौसम के कारण इमरजेंसी लैंडिंग की कोशिश कर रहा था, तभी वह क्रैश हो गया। इस हादसे में अजित दादा के साथ सवार सभी पांच लोगों की जान चली गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और कई विपक्षी नेताओं ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। इस व्यक्तिगत क्षति के साथ ही अब महाराष्ट्र की राजनीति में एक ‘महाशून्य’ पैदा हो गया है। चाचा की छांव से निकलकर महाराष्ट्र की राजनीति में अजित अजातशत्रु बन गए थे। महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे कद्दावर और कड़क मिजाज नेता और राज्य के डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन ने न केवल पवार परिवार को बल्कि समूची एनसीपी (अजित गुट) को नेतृत्वविहीन कर दिया है। अब सवाल यह है कि बारामती की गद्दी और 'दादा' का रुतबा कौन संभालेगा? क्या शरद पवार की एनसीपी और एनसीपी (अजित) गुट एक होगा? क्या अजित पवार की राज्यसभा सांसद पत्नी सुनेत्रा पवार आगे आएंगी या फिर प्रफुल्ल पटेल पार्टी के संकटमोचक बनेंगे? या फिर अजित पवार के दोनों बेटों, भतीजे रोहित पवार या बहन सुप्रिया सुले आगे आएंगी? अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार को राजनीति का अनुभव है, हालांकि उन्हें पिछले चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था। छोटे बेटे जय पवार फिलहाल पर्दे के पीछे से काम संभालते रहे हैं। चाणक्य और संगठन की मजबूती पार्टी के भीतर प्रफुल्ल पटेल सबसे अनुभवी चेहरा हैं। अजित पवार के विद्रोह के समय पटेल ही उनके सबसे बड़े रणनीतिकार थे। दुख की घड़ी में शरद पवार और सुप्रिया सुले की भी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। शरद पवार गुट के विधायक और अजित पवार के भतीजे रोहित पवार के लिए भी यह कशमकश वाली स्थिति नया मौका दे सकती है।