रफीक खान
दिल्ली हाई कोर्ट ने चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों द्वारा क्रिप्टोकरेंसी जैसी Virtual Digital Assets के खुलासे से जुड़े मुद्दे पर केंद्र सरकार को छह महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह निर्देश अधिवक्ता एवं RTI कार्यकर्ता दीपांशु साहू द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) का निपटारा करते हुए दिया गया। Cryptocurrencies fall under the money laundering law, assets still remain undeclared in election affidavits by default
जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि याचिका में मांग की गई थी कि Representation of the People Act, 1951 के तहत दाखिल किए जाने वाले Form 26 में क्रिप्टो संपत्तियों के लिए अलग और अनिवार्य कॉलम जोड़ा जाए, क्योंकि क्रिप्टो परिसंपत्तियाँ पहले से ही आयकर और मनी लॉन्ड्रिंग कानूनों के तहत मान्य संपत्ति हैं। दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की युगल पीठ ने अपने आदेश में कहा कि याचिका में उठाई गई शिकायतों पर केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालय द्वारा अधिक उपयुक्त रूप से विचार किया जा सकता है। अदालत ने मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह याचिका में उठाई गई शिकायतों पर यथाशीघ्र, अधिकतम छह महीने के भीतर, सूचित निर्णय ले और उस निर्णय की जानकारी याचिकाकर्ता को भी दे। याचिकाकर्ता दीपांशु साहू ने इससे पहले मार्च 2025 में Election Commission of India और Ministry of Finance को अभ्यावेदन भेजकर क्रिप्टो खुलासे को अनिवार्य बनाने की मांग की थी। वित्त मंत्रालय ने सुझावों को “नीति निर्माण में ध्यान में रखने” की बात कही थी, जबकि कानून मंत्रालय ने इसे ईसीआई के अधिकार क्षेत्र का विषय बताया था।
