अवैध वसूली के चक्कर में जेल से लेकर बाहर तक सेटिंग, पेशी के नाम पर सैर-सपाटा, मेडिकल में भर्ती का भी खेल - khabarupdateindia

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अवैध वसूली के चक्कर में जेल से लेकर बाहर तक सेटिंग, पेशी के नाम पर सैर-सपाटा, मेडिकल में भर्ती का भी खेल


रफीक खान
जेल की सलाखों के नाम पर जहां अच्छे लोगों की रूह कांप जाती है, वहीं मध्यप्रदेश के जबलपुर में बुरे लोगों की मौज है। पेशेवर अपराधी, हत्या-लूट और डकैती जैसी संगीन वारदातों के आरोप में जेल पहुंचते हैं और वहां उनका एक नया साम्राज्य शुरू हो जाता है। अवैध वसूली के चक्कर में जेल प्रशासन के जिम्मेदार भी उनके सहयोगी बन जाते हैं। वायरल हो रहे कुछ वीडियो को लेकर इसी तरह की चर्चाएं हैं। एक वीडियो में नजर आ रहा है कि हत्या का आरोपी पुलिस वालों और अपनी पूरी गैंग के साथ मस्ती करते हुए जा रहा है। यानी कि उसे पुलिस अभिरक्षा में कोई रोक-टोक नहीं है। स्वभाविक तौर पर ऐसा तभी हो सकता है, जब जिम्मेदार पूरा संरक्षण दे रहे हो। In the name of illegal extortion, there is a setting from jail to outside, tours in the name of appearance, and even the game of admission in medical.

कहने को तो पुलिस और प्रशासन पर आरोप लगाना परंपरागत और बहुत आसान काम है लेकिन जब कोई फोटो या वीडियो सामने आता है तो कहानी खुद बयां होने लगती है। अगर सिस्टम टाइट है तो मजाल है कि अपराधी सिर भी उठा ले, फिर उसका हंसना-मुस्कुराना और याराना तो बहुत दूर की बात है। जब तब इस तरह की तस्वीरें मध्य प्रदेश में वायरल हुई हैं तो जेल मुख्यालय ने सख्त एक्शन लिया है। अब जबलपुर में ऐसे नजारे देखने को मिल रहे हैं। वायरल वीडियो हत्या के किसी नूरुद्दीन उर्फ चेन्नई वल्द सईद अंसारी नाम के आरोपी और उसके सहयोगियों चंदन और चिंटू यादव आदि के बताए जा रहे हैं। वीडियो और फुटेज भी इन्हीं अपराधियों के शुभचिंतकों ने तैयार किए हैं और कानून-कायदों को भूलकर वायरल भी कर डाले। जब बात जिम्मेदारी की आती है तो अपनी-अपनी बचाने के लिए जेल प्रशासन अक्सर पुलिस पर और पुलिस प्रशासन जवाबदेही जेल प्रशासन पर ठोक देता है। हालांकि जेल और पुलिस सिस्टम के महत्वपूर्ण अंग है और अगर यह अपराधियों पर लगाम लगाने कमर कस लें तो कहीं कोई उंगली ही नहीं उठेगी। 

होता है सख्त एक्शन

जेल मुख्यालय सूत्रों का स्पष्ट कहना है कि मामला अगर जेल के बंदियों से संबंधित होता है तो अंदर के मामलों में जेल सुपरिंटेंडेंट खुद एक्शन लेते हैं और अगर जेल से बाहर भेजे जाने के दौरान का है तो संबंधित पुलिस अधीक्षक को फ़ौरन जिम्मेदार पुलिस कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने के लिए सम्बंधित जिले के एसपी को पत्र लिख दिया जाता है। जबलपुर में अब ऐसा मामला सामने आया है, देखना होगा कि इसमें कितनी संवेदनशीलता और गंभीरता बरती जाती है। हालांकि जेल डीआईजी तथा जबलपुर के सुपरिंटेंडेंट अखिलेश तोमर का इस मामले में कहना है कि उनके संज्ञान में अब तक ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है। अगर शिकायत मिलती है या कोई वीडियो सामने आता है तो निश्चित तौर पर कार्रवाई की जाएगी।