रफीक खान
मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर से फरार इनामी पार्षद शफीक हीरा का प्रचार प्रसार लगातार सोशल मीडिया पर जारी है। पुलिस उसकी हिस्ट्री शीट और वारंट को लेकर यहां-वहां भटक रही है, जबकि पार्षद शफीक हीरा के समर्थक खुलेआम कानून का मजाक उड़ा रहे हैं। फेसबुक और व्हाट्सएप ग्रुप में उसकी फोटो तथा संदेशों को वीडियो-फुटेज के साथ प्रसारित किया जा रहा है। उक्त आशय की शिकायत अनेक अधिवक्ताओं ने एसपी दफ्तर पहुंचकर एडिशनल एसपी सूर्यकांत शर्मा से की है। जिसमें उन्होंने फरार पार्षद शफीक हीरा और उसके फरार भांजे मोहम्मद जावेद तथा फरारी में इनका सहयोग करने वाले लोगों के नाम, मोबाइल नंबर आदि का संपूर्ण विवरण भी प्रस्तुत किया है। अब देखना होगा कि कानून का मजाक उड़ाने वालों पर पुलिस कब तक कार्रवाई कर पाएगी? Former councillor Tahir Ali filed a complaint with the names, mobile numbers and vehicle numbers of those who made a mockery of the law.
जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि एसपी को सम्बोधित शिकायत में उल्लेखित है- गोहलपुर थाने के अंतर्गत भूमाफिया निर्दलीय पार्षद शफीक हीरा (मामा) जिसके ऊपर लगभग 14 मामले दर्ज है, उसके यूसुफ जावेद (भांजा) के ऊपर एक फर्जी रजिस्ट्री मामले में गोहलपुर थाने में अपराध क्रमांक 522/2025 (भारतीय न्याय संहिता) के तहत दिनांक 24/7/2025 को दर्ज हुआ है। उसके बाद लगभग 6 माह से यूसुफ जावेद लगातार फरार है और शफीक हीरा लगभग 50 दिन से फरार है। इस मामले का पूरा षड्यंत्रकारी निर्दलीय पार्षद भूमाफिया शफीक हीरा है। उसी के आफिस में पूरा षडयंत्र, फर्जी आधार कार्ड, फर्जी महिला सबको तैयार किया गया। इस मामले में मामा-भांजे तथा 4 अन्य के ऊपर 5 हजार रुपया ईनाम घोषित किया गया। इस दौरान लगातार सोशल मीडिया, फेसबुक, इंस्ट्राग्राम पर सक्रीय शफीक हीरा को फरारी में संरक्षण देने वाले कुछ लोग लगातार इस आरोपी का लाइव वीडियो, फोटो फेसबुक, वीडियो लगातार डाल रहे है। जिसमे रक्तचरित्र जैसे क्रिमिनल मूवी सांग डालकर डरा रहे और आरोपी के साथ है। जिसमें आमिर अंसारी उर्फ गुड्डा (9981401977_9301599777)( इसकी शिफ्ट डिजायर कार नंबर MP-20-ZH-5557),
एस. के. फैज (7049092674) समीर असारी (+91 93406 60611) बाबू एमराईडर, इसरार,नवाजिश अंसारी (+919713624142) ,आबिद मंसूरी (9926321117_7000468936) एवं अन्य व्यक्ति है, जो इन लोगो के साथ लगातार फरारी कटवा रहे है। अपराधी भूमाफिया शफीक हीरा को संरक्षण देने का मामला इन सभी पर दर्ज किया जाये। जिसमे फरार / इनामी आरोपी को घर में छिपाना
अपराध: अपराधी को शरण देना (Harbouring Offender)
IPC (पुरानी धाराएँ):
धारा 212 IPC – अपराधी को छिपाना या शरण देना
धारा 216 IPC – फरार अपराधी को शरण देना
सज़ा:
3 से 5 साल तक की जेल + जुर्माना
अगर मूल अपराध गंभीर (318,3(5),337,338,61(2)जमीन घोटाला) है तो सज़ा और कड़ी
BNS (नया कानून):
IPC 212/216 की समकक्ष धाराएँ BNS में लागू होती हैं
नाम बदल गया है,अपराध वही है: “अपराधी को जानबूझकर शरण देना”
2. फरार / इनामी आरोपी के साथ वीडियो बनाना, प्रचार करना
अपराध: अपराध में सहायता (Abetment)
IPC:
धारा 107 IPC – अपराध में उकसाना / सहायता
धारा 109 IPC – सहायता करने पर दंड
अगर वीडियो से यह साबित हो जाए कि:
आरोपी फरार/इनामी था
और जानते-बूझते साथ दिया गया
तो वीडियो मजबूत सबूत बनता है।
BNS:
Abetment की समकक्ष धाराएँ लागू होती हैं
3. आरोपी को पुलिस से बचाने में मदद
जैसे:
मोबाइल देना
पैसे देना
अपनी गाड़ी में घूमना
ठिकाना बदलवाना
पुलिस को गलत जानकारी देना _IPC:
धारा 201 IPC – सबूत मिटाना / अपराधी को बचाना
सज़ा:
3 से 7 साल तक (केस की गंभीरता पर निर्भर)
4.अगर आरोपी घोषित फरार / इनामी है
तो साथ देने वाले पर:
अलग FIR
जमानत मुश्किल
ये लोग पुलिस प्रसाशन को आँख दिखा रहे है, इसके अंदर से पुलिस प्रशासन का डर खत्म हो गया है इसलिए इन लोगो पर जल्द से जल्द कार्यवाही की जाये। इन अपराधियों से अधिवक़ता अल्तमस एवं उनके पिता हाजी असलम खान (सह सचिव जबलपुर चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स ) और उनकी पूरे परिवार को जान से खतरा है।
