रफीक खान
गुजरात की स्कॉर्पियो से ले जाए जा रहे हवाला के एक करोड रुपए में से 20 लाख रुपए लूटने और फिर एक आईपीएस की दखल के बाद उसे वापस करने के मामले में संबंधित थाने के प्रभारी, चौकी प्रभारी सहित चार पुलिसकर्मियों को जहां सस्पेंड कर दिया है। वही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने गुना के पुलिस अधीक्षक अंकित सोनी को भी हटा दिया है। गुना में श्रीमती हितिका वसल को पुलिस कप्तान का दायित्व सोपा गया है। मामला आईपीएस की एंट्री के कारण रातों-रात खुल गया लेकिन गुना के वरिष्ठ अधिकारियों ने सिवनी जिले में हुई हवाला लूट कांड के बाद जबलपुर के पुलिस महा निरीक्षक जैसी तत्परता नहीं दिखाई? मामले में कोई भी मुकदमा भी अब तक दर्ज नहीं किया गया है। पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के एक्शन के बाद पूरी सच्चाई जानने के निर्देश दिए हैं।Senior officers did not show the same urgency as Jabalpur IG, DGP's instructions after CM's action
जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि ग्वालियर रेंज के डीआईजी अमित सांघी गुना पहुंच गए हैं। आधी रात तक मामले की जांच के बाद उन्होंने पुलिसकर्मियों का आचरण संदिग्ध पाए जाने पर धरनावदा थाना प्रभारी प्रभात कटारे, रुठियाई चौकी प्रभारी साजिद हुसैन, प्रधान आरक्षक देवेंद्र सिकरवार और आरक्षक सुंदर रमन को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही शिवपुरी जिले के करैरा अनुविभाग के एसडीओपी आयुष जाखड़ को आगे की जांच सौंप दी है। करैरा एसडीओपी सात दिन गुना में रुककर मामले की हर परत को खंगालने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उल्लेखनीय है कि जिस कार को पुलिस ने रोका था, वह गुजरात के सूरत में पंजीकृत थी। यह कार यश प्रवीण भाई पटेल के नाम पर पंजीकृत है। जिस आईपीएस का फोन आने के बाद वरिष्ठ अधिकारी सक्रिय हुए और पुलिस वालों ने रिश्वत की रकम लौटाई, वह भी सूरत में ही पदस्थ हैं। रुठियाई चौकी के एएसआई साजिद हुसैन द्वारा ही हाईवे पर वाहन चेकिंग की जा रही थी, जिन्हें गाड़ी में नकदी होने की जानकारी मिली थी। गाड़ी रोकने के बाद उन्होंने धरनावदा थाना प्रभारी प्रभात कटारे को सूचना दी। मामले में धरनावदा थाना प्रभारी कटारे की मुख्य भूमिका रही। बताया गया है कि उन्होंने ही मौके पर पहुंचकर कथित सेटलमेंट किया। प्रधान आरक्षक देवेंद्र सिकरवार वाहन चेकिंग के दौरान हाईवे पर वाहनों को रोक रहे थे। गुजरात की कार को भी उनके द्वारा रोका गया। आरक्षक सुंदर रमन की भूमिका घटनाक्रम के समय मौजूद रहने की रही, वे चौकी प्रभारी के वाहन चालक थे।
