रफीक खान
मध्य प्रदेश के परिवहन विभाग में पदस्थ सिपाही सौरभ शर्मा का बहुचर्चित मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। मनी लांड्रिंग तथा काली कमाई के गोरख धंधे में जबलपुर के रोहित तिवारी सहित कुल 12 लोगों पर विशेष न्यायालय द्वारा आरोप तय कर दिए गए हैं। रोहित तिवारी पर जांच में सिपाही सौरभ शर्मा की काली कमाई को ठिकाने लगाने का आरोप मुख्य तौर पर है। हालांकि जैसी उम्मीद की जा रही थी कि 11 करोड रुपए नगद और 52 किलो सोने वाले इस मामले में प्याज के छिलकों की तरह उधड़ते हुए कई खुलासे होना थे लेकिन वैसा कुछ नहीं हो पाया। बड़े रसूख के आगे सौरभ शर्मा के परिवार और रिश्तेदारों पर ही पूरा मामला समेट दिया गया लगता है। A total of 12 people have been charged by the special court in the case involving Rs 11 crore in cash and 52 kg of gold.
जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि प्रवर्तन निदेशालय ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में सौरभ शर्मा के साथ-साथ उसके सहयोगी चेतन सिंह गौर, शरद जायसवाल, साले रोहित तिवारी, पत्नी दिव्या तिवारी, मां उमा शर्मा, जीजा विनय हासवानी और ड्राइवर प्यारे लाल केवट को नामजद किया है। जांच एजेंसी ने कोर्ट में जो चालान पेश किया है, उसमें न केवल व्यक्ति बल्कि 4 संदिग्ध कंपनियां भी शामिल हैं, जिनके जरिए काले धन को सफेद करने का खेल खेला जा रहा था। इस केस की सबसे चौंकाने वाली कड़ी वह लावारिस इनोवा कार थी, जो छापेमारी के दौरान भोपाल में मिली थी। जब जांच एजेंसी ने इस गाड़ी की तलाशी ली, तो कार के अंदर से 11 करोड़ रुपए नकद और 52 किलो सोना बरामद हुआ था। जांच में यह साफ हो गया कि इस कार का सीधा संबंध सौरभ के नेटवर्क से था। इसका रजिस्ट्रेशन उसके करीबी चेतन सिंह गौर के नाम पर था। एक मामूली सिपाही सौरभ शर्मा ने महज सात साल की सेवा में लगभग 550 करोड़ रुपए की अकूत संपत्ति खड़ी कर ली थी। ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि सौरभ का दुबई में 150 करोड़ रुपए का एक आलीशान बंगला भी है। भ्रष्टाचार की यह जड़ें इतनी गहरी थीं कि ईडी ने 23 दिसंबर 2024 को मामला दर्ज कर भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर के कई ठिकानों पर एक साथ दबिश दी थी। जांच में इस बात का खुलासा नहीं हो पाया कि आखिर कौन से तौर तरीकों और किस-किस के माध्यम, संलिप्तता के साथ यह अकूत संपत्ति एकत्रित की गई है।
