CG में नक्सली हमला, 3 जवान हुए शहीद, डेढ़ दर्जन गंभीर रूप से घायल, हेलीकॉप्टर से भेजा गया रायपुर - khabarupdateindia

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CG में नक्सली हमला, 3 जवान हुए शहीद, डेढ़ दर्जन गंभीर रूप से घायल, हेलीकॉप्टर से भेजा गया रायपुर




Rafique Khan
छत्तीसगढ़ के सुकमा में मंगलवार को नक्सलियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर तीन जवानों को शहीद कर दिया। करीब डेढ़ दर्जन जवान गंभीर रूप से चोटिल हुए हैं। जिन्हें इलाज के लिए हेलीकॉप्टर से रायपुर पहुंचा गया है। घटना के बाद समूचे छत्तीसगढ़ में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। शासन तथा पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक भी चल रही है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों पर हुए इस हमले के बाद विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंच गए हैं। हमलावर नक्सलियों की तलाश में भी ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है।

घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार बताया जाता है कि छत्तीसगढ़ के सुकमा इलाके में नक्सलियों ने मंगलवार को सुरक्षाबलों के जवानों पर ताबड़तोड़ फायरिंग की। हथियारों से लैस नक्सलियों ने बीजापुर–सुकमा के सीमावर्ती इलाके टेकलगुड़ेम में बने नए कैंप को निशाना बनाया। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के कैंप पर हुए हमले में 3 जवान शहीद हो गए। जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि सुरक्षाबलों ने सुकमा जिले के टेकलगुड़ेम गांव में सीआरपीएफ का कैंप स्थापित किया है। यहां पर सीआरपीएफ, एसटीएफ और पुलिस के जवान नक्सली गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए तैनात किए गए। जवानों की एक टुकड़ी सर्चिंग पर निकलने वाली थी, इसी दौरान बड़ी संख्या में घात लगाए बैठे नक्सलियों ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद कोबरा, एसटीएफ, डीआरजी बल के जवानों ने भी हमले का माकूल जवाब दिया। सुरक्षाबलों को भारी पड़ता देख नक्सली जंगल की आड़ लेकर भाग निकले। बताया जाता है कि अभी घायल 6 जवानों का जगदलपुर मेडिकल कालेज में इलाज चल रहा है। जबकि 8 जवानों को हेलिकॉप्टर से रायपुर रेफर किया गया। घायल जवानों की स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है।


2021 में शहीद हुए थे यहीं पर 23 जवान

गौरतलब है कि आज जिस इलाके में नक्सलियों ने कैंप पर हमला किया है, उसी टेकलगुड़ेम के जंगलों में 2021 में नक्सलियों और सुरक्षाबलों के जवानों के बीच बड़ी मुठभेड़ हुई थी। इस दौरान 23 जवान शहीद हुए थे। यह इलाका नक्सलियों का गढ़ माना जाता है और यहां पर नक्सलियों की चहल कदमी 12 महीने लगातार बनी रहती है। यही वजह है कि नक्सलियों की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए कैंप बनाया गया है।