उद्यानिकी विभाग के तत्कालीन उपसंचालक, विस्तार अधिकारी, योजना प्रभारी सहित 5 को 7-7 साल की सजा, ADJ कोर्ट ने सुनाया पाली हाउस योजना में घोटाले पर फैसला - khabarupdateindia

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Friday, 8 March 2024

उद्यानिकी विभाग के तत्कालीन उपसंचालक, विस्तार अधिकारी, योजना प्रभारी सहित 5 को 7-7 साल की सजा, ADJ कोर्ट ने सुनाया पाली हाउस योजना में घोटाले पर फैसला


रफीक खान
मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले में वर्ष 2016 से 2017 के बीच पाली हाउस योजना के तहत जमकर भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ था, जिस पर जांच के बाद अपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया गया और जांच के बाद मामला न्यायालय पहुंचा, जहां एडीजी कोर्ट ने उद्यानकी विभाग के तत्कालीन उपसंचालक विस्तार अधिकारी तथा योजना शाखा के प्रभारी के अलावा दो अन्य आरोपियों को 7 साल की सजा से दंडित किया है। भ्रष्टाचारियों को 7-7 साल की सजा के अलावा 3 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। सजा पाने वालों में तत्कालीन उपसंचालक रमेश पीपल्दे ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी अनिल बिरला, योजना शाखा प्रभारी दिनेश चौहान, देवीलाल रंगोटा तथा गुजरात की पिक विजन कंपनी के कर्मचारी उमेश पटेल शामिल है।

इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार बताया जाता है कि प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रदीप दुबे ने पांचो को दोषी मानते हुए सात-सात साल सश्रम कारावास और प्रत्येक पर तीन-तीन लाख के जुर्माने की सजा सुनाई है। तत्कालीन उप संचालक रमेश पिपल्दे, ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी अनिल बिरला, शाखा प्रभारी दिनेश चौहान, देवीलाल रांगोटा और पिंक विजन कम्पनी के कर्मचारी उमेश पटेल को यह सजा सुनाई गई है।
अभियोजन अधिकारी एजीपी यशराज परमार के अनुसार वर्ष 2017 में आगर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर अभियोजन के लिए प्रस्तुत किया था।

पॉली हाउस बिना निर्माण किए राशि का भुगतान

आरोपियों ने आपस में मिलकर आपराधिक षडयंत्र के तहत कपटपूर्वक शासन की संपत्ति हडपने के उद्देश्य से 14 लाख 20 हजार रूपए पिंक विजन एग्रोटेक कंपनी को पॉली हाउस बिना निर्माण किए राशि का भुगतान कर शासन को नुकसान पहुंचाकर छल किया। उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण विभाग में विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए और कारोबार के अनुकम में जान-बूझकर कपट करने के आशय से लेखा दस्तावेजों में मिथ्या प्रविष्टियां की गई और उनमें तात्विक विशिष्टियों का लोप कर लेखा का मिथ्याकरण किया और आपराधिक षड़यंत्र कारित किया। विचारण के दौरान न्यायाधीश दुबे ने प्रकरण में धारा 420, 467, 468, 471, 477ए, 409 सहपठित धारा 120 बी भा.द.सं. में अभियोजन साक्ष्यों और प्रकरण में विचारण के बाद धारा 420, 477ए, 409 सहपठित धारा 120बी के तहत पांचों आरोपियों को दोषी मानते हुए 7-7 वर्ष के कठोर कारावास और प्रत्येक को 3-3 लाख रूपए के जुर्माने से दण्डित करने की सजा सुनाई है, जुर्माने की राशि अदा ना करने पर 1 वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।