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Saturday, 12 July 2025

खुलेआम लड़ रहा प्रशासन! क्या मध्यप्रदेश में कलेक्टर के बाद कोई भी जिम्मेदार नहीं है शासन का?


रफीक खान
मध्य प्रदेश के भिंड जिले में शासन और प्रशासन खुले आम लड़ रहा है। तहसीलदार लगातार डेढ़ साल से एसडीएम और कलेक्टर पर गंभीर आरोप लगा रही है। तहसीलदार द्वारा लगाए गए आरोप कितने सही है या गलत है? इस बात को सरकार जांच भी नहीं पा रही है। ऐसा लग रहा है जैसे कि मध्य प्रदेश में सरकार का पूरा सिस्टम कलेक्टर के बाद खत्म हो जाता है। अगर कलेक्टर गलत है तो उन पर क्यों करवाई नहीं हो रही है? एसडीएम गलत है तो उन पर क्यों एक्शन नहीं किया जा रहा है? और अगर तहसीलदार के आरोप बेबुनियाद और मनगढ़ंत है तो फिर उसे क्यों बख्शा जा रहा है? The administration is fighting openly! Is there no one responsible for the administration after the collector in Madhya Pradesh?

जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि तहसीलदार माला शर्मा ने भिंड के कलेक्टर और IAS अधिकारी संजीव श्रीवास्तव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शर्मा का दावा है कि कलेक्टर और SDM पराग जैन उन्हें पिछले डेढ़ साल से लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं। इस विवाद में अवैध कब्जे (illegal encroachment), निजी भूमि (private land), सरकारी पट्टा (government lease), और मानसिक उत्पीड़न (mental torture) जैसे मुद्दे शामिल हैं, जो भिंड जिले के प्रशासनिक तंत्र में तनाव को उजागर करते हैं। हाल ही में एक चार मिनट का वीडियो जारी कर तहसीलदार माला शर्मा ने अपनी आपबीती साझा की। उन्होंने कहा, "मुझे शासन के हित में काम करने की सजा मिल रही है। एक महिला अधिकारी होने के बावजूद कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव और SDM पराग जैन मुझे प्रताड़ित कर रहे हैं।" शर्मा का आरोप है कि "मौ" में एक जमीन पर अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के कारण कलेक्टर उनसे नाराज हैं। माला शर्मा का कहना है कि यदि उनका फैसला गलत है तो कलेक्टर अपील में सुनवाई करके सही फैसला कर सकते हैं। माला शर्मा ने दावा किया कि उनकी कार्रवाई के बाद कलेक्टर ने उनका आदेश तो स्वीकार किया, लेकिन इसके बाद उनके खिलाफ FIR दर्ज कराने की बात तक पहुंच गई। शर्मा ने बताया कि उन्हें जानबूझकर अटैच किया गया, और हालांकि कोर्ट ने उनका अटैचमेंट रद्द कर दिया, लेकिन कलेक्टर ने उन्हें बिना अधिकार के तहसीलदार बनाकर मौ भेज दिया। शर्मा ने यह भी कहा, "मैंने कलेक्टर से माफी मांगी और दुर्भावना न रखने की अपील की, लेकिन मेरे साथ अन्याय हो रहा है। पिछले साल से मेरा इंक्रीमेंट नहीं हुआ, जबकि अन्य अधिकारियों का हुआ है।" उन्होंने मुख्यमंत्री से सोशल मीडिया के जरिए गुहार लगाई कि उनके साथ द्वेषपूर्ण व्यवहार हो रहा है और उन्हें न्याय चाहिए।