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Wednesday, 30 July 2025

MP की ज्यूडिशरी में ये क्या? सीनियर के खिलाफ जूनियर का ऐसा गुस्सा, चीफ जस्टिस को लिखा खुला पत्र


रफीक खान
मध्य प्रदेश के न्याय जगत में एक जूनियर महिला जज ने अपने सीनियर के खिलाफ हुंकार भरते हुए हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के नाम खुला पत्र भेज दिया है। महिला जज का आरोप है कि जिस सीनियर जज की उसने शिकायत की, उस पर न्यायिक अधिकारियों ने बजाय उसे पदोन्नत करते हुए हाईकोर्ट का जज बना दिया। न्याय जगत में इस तरह के व्यवहार की उसे उम्मीद नहीं थी। What is this in MP's judiciary? Junior is so angry against senior that he wrote an open letter to the Chief justice

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पत्र में शहडोल जिले की जूनियर डिवीजन सिविल जज अदिति शर्मा ने लिखा है कि
'मैं बदला नहीं चाहती थी, मैं न्याय मांग रही थी। सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि उस संस्था के लिए जिसमें मैंने विश्वास किया। अब मैं जा रही हूं, ऐसे जख्मों के साथ जिन्हें न तो बहाली, न मुआवजा और न ही कोई माफी भर सकेगी। यह पत्र जिन फाइलों में दर्ज होगा, उन्हें ताउम्र परेशान करता रहे'। अदिति ने कहा कि उन्हें कई साल तक लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने इस उम्मीद में हर कानूनी मार्ग अपनाया कि अगर, उन्हें न्याय न भी मिले तो कम से कम उनकी बात तो सुनी जाएगी। जिस व्यक्ति ने मुझे पीड़ा दी, उससे कोई सवाल नहीं किया गया, बल्कि उसे पुरस्कृत किया गया, सिफारिश की गई और पदोन्नत किया गया। समन देने की बजाय उसे सम्मान का मंच दे दिया गया। अदिति ने यह भी कहा कि उन्होंने उक्त न्यायाधीश के खिलाफ सबूतों के साथ शिकायत की थी, लेकिन फिर भी न कोई जांच हुई, न कोई नोटिस दिया गया और न ही कोई स्पष्टीकरण मांगा गया। अब उसे 'न्यायमूर्ति' कहा जा रहा है, जो इस शब्द के साथ एक क्रूर मजाक है। उल्लेखनीय है कि 2023 में अदिति शर्मा सहित छह महिला न्यायिक अधिकारियों को 'असंतोषजनक प्रदर्शन' के आरोप में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले में स्वतः संज्ञान लिया था। 1 अगस्त 2024 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ज्योति वरकड़े, सोनाक्षी जोशी, प्रिया शर्मा और रचना अतुलकर जोशी को कुछ शर्तों के साथ बहाल कर दिया था, लेकिन अदिति कुमार शर्मा और सरिता चौधरी को राहत नहीं दी गई थी। हालांकि, 28 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अपने सख्त फैसले में अदिति शर्मा की बर्खास्तगी को "मनमाना और अवैध" करार देते हुए उन्हें बहाल करने का आदेश दिया था।