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Wednesday, 10 September 2025

ऐसी रिश्वतखोरी, नौकरी मास्टरी की कर रहे बाबूगिरी, साथी मास्टर पर भी तरस नहीं, चपरासी को भी बना दिया घूसखोर


रफीक खान
खराब नियत और लालच के चलते सारी नैतिकता चटपट हो रही है। कानून का भी डर नहीं रह गया है। नौकरी मिली मास्टरी की, वह भी पूरे मास्टर नहीं बन पाए। सहायक शिक्षक की नौकरी करने वाले रिश्वतखोर ने जुगाड़ जमाया और बाबू गिरी करने लगा फिर अपने ही साथी शिक्षकों से रिश्वत वसूलता रहा। एक साथी शिक्षक अपने निलंबन अवधि का पैसा निकलवाने के लिए पहुंचा तो उससे ₹500000 की रिश्वत मांगी गई। सौदा तय होने के बाद ₹100000 रिश्वत लेते हुए अपने चपरासी को भी गिरफ्तार करवा दिया। लोकायुक्त पुलिस ने इस छापा कार्रवाई में सहायक शिक्षक और चपरासी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मुकदमा पंजीबद्ध किया है। Such bribery, clerks doing the job of a teacher, no mercy even on fellow teachers, even the peon has been made a bribe taker

जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के पलेरा में सीएम हाउस स्कूल में सागर लोकायुक्त की टीम ने बड़ी कार्रवाई की। सहायक शिक्षक कैलाश खरे और चपरासी शंकर लाला कटारे को 1 लाख रूपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों पकड़ा है। रिश्वतखोर सहायक शिक्षक कैलाश खरे के खिलाफ माध्यमिक शाला बेला में पदस्थ सहायक शिक्षक अनिल कुमार खरे ने सागर लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में फरियादी शिक्षक अनिल कुमार ने बताया कि निलंबन अवधि का वेतन निकलवाने के लिए वो सहायक शिक्षक कैलाश खरे से मिले थे जिसके एवज में उसने उनसे 5 लाख रूपये की रिश्वत मांगी थी, बाद में सौदा 1 लाख रूपये में तय हुआ था। रिश्वतखोरी में पकड़े गए सहायक शिक्षक पर कई दिनों से लोकायुक्त पुलिस भी नजर थी। वह किसी भी छोटे कर्मचारियों को बख्शता नहीं था। वह बिना घूसखोरी के कोई काम नहीं करता था।