जबलपुर में पहली बार वक्फ कमेटी को लेकर इतना बड़ा विवाद, अंसारी समाज की भी नहीं चली - khabarupdateindia

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जबलपुर में पहली बार वक्फ कमेटी को लेकर इतना बड़ा विवाद, अंसारी समाज की भी नहीं चली


रफीक खान
मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र के बीचों -बीच स्थित मोमिन ईदगाह पर वक्फ बोर्ड द्वारा गठित नई कमेटी के चार्ज को लेकर सोमवार को बवाल खड़ा हो गया। अंसारी समाज और नई कमेटी आमने-सामने टकराने की स्थिति में पहुंच गई थी। चार्ज दिलाने के लिए वक्फ बोर्ड तथा सत्तारुढ़ पार्टी की मंशा अनुसार पुलिस व प्रशासन का बड़ा अमला मौजूद था। जिसने फोर्सली चार्ज दिलाया। इस बीच विरोध प्रदर्शन कर रहे मुस्लिम पार्षदों, अंसारी समाज के नेताओं सहित 18 लोगों को हिरासत में लेकर सिविल लाइन ले जाया गया और बाद में 16 को जेल भेज दिया गया। एक पार्षद गुलाम हुसैन को पुलिस से झूमा झटकी के दौरान चोटिल होने के कारण विक्टोरिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जबलपुर के इतिहास में पहली बार वक्फ बोर्ड की किसी कमेटी को लेकर इस तरह की हंगामे की स्थिति देखने को मिली है। अंसारी समाज में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तनाव का माहौल बना हुआ है। For the first time in Jabalpur, such a huge controversy took place regarding the Waqf Committee, even the Ansari community did not get their way.

दरअसल जबलपुर में सबसे बड़ा समाज अंसारी बिरादरी का है। अंसारियां की सात गांव की कमेटी भी है और समाज के सभी अहम फैसले यह समिति लेती है। गोहलपुर ईदगाह भी मन समाज का ही है और अब तक परंपरा अनुसार अंसारी समाज द्वारा जिन लोगों को चयनित कर नई कमेटी के रूप में भेजा जाता था, वही यहां इंतजामियां कमेटी के रूप में काम करती थी। बदलते परिवेश में तत्कालीन कमेटी का काफी विरोध हुआ लेकिन अंसारी समाज उस कमेटी को लेकर तटस्थ बना रहा। वक्फ बोर्ड ने सत्तारूढ़ पार्टी के समर्थकों की एक नई कमेटी बनाकर जनवरी 2025 में अप्रूव कर दी, जिसे बिरादरी को संचालित और नियंत्रित करने वाली अंसारी समाज ने नकार दिया था। बक्फ एक्ट के साथ ही इस बात का जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। रात्रि में कई दिनों तक सभाएं भी चली, लेकिन इस सबका वक्फ बोर्ड पर कोई असर नहीं पड़ा और नई कमेटी को यथावत रखा गया। समाज की राजामंदी ना होने के कारण नई कमेटी मोमिन ईदगाह का चार्ज नहीं ले सकी। जिसके चलते उसने पुलिस व प्रशासन के रास्ते अपनी जगह बनाई। सोमवार को कई थानों की पुलिस और खुद अधारताल सबडिवीजन के एसडीम पंकज मिश्रा के मौजूदगी में चार्ज दिलवा दिया गया। अंसारी समाज सोमवार को भी पुलिस व प्रशासन तथा वक्फ बोर्ड की इस कार्रवाई को गलत बताता रहा। दोपहर में विरोध प्रदर्शन कर रहे अंसारी समाज के मुख्य सरदार हकीम बाबा, पार्षद याकूब अंसारी, वकील अंसारी, शफीक हीरा, गुलाम गौस सहित डेढ़ दर्जन लोगों को हिरासत में ले लिया गया। बाद में मुख्य सरदार हकीम बाबा का नाम गिरफ्तारी से अलग कर बाकी को जेल भेज दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि अब तक जो अंसारी समाज की कमेटी पूरी बिरादरी को नियंत्रित, संचालित और मार्गदर्शित करती रही उसकी अपनी ही बिरादरी की मिल्कियत में एक भी नहीं चल पाई है। जिसे लेकर बड़ा चिंतन और बहस छिड़ गई है। समाज कभी भी इस मुद्दे को लेकर आम बैठक आयोजित कर सकता है।