उज्जैन में महाकाल लोक परिसर विस्तार के लिए जमीन का अधिग्रहण, हाईकोर्ट का पुनर्निर्माण अनुमति से इंकार - khabarupdateindia

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उज्जैन में महाकाल लोक परिसर विस्तार के लिए जमीन का अधिग्रहण, हाईकोर्ट का पुनर्निर्माण अनुमति से इंकार


रफीक खान
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के गृह नगर उज्जैन स्थित महाकाल लोक परिसर विस्तार के लिए जिस 200 साल पुरानी तकिया मस्जिद को अधिग्रहण कर ढहाया गया था, उसके दोबारा निर्माण संबंधी याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट में मुस्लिम पक्ष द्वारा याचिका प्रस्तुत कर निवेदन किया गया था लेकिन उसे खारिज कर दिया गया है। अदालत ने मुस्लिम समुदाय के लोगों की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि धर्म का पालन करने के लिए संविधान प्रदत्त अधिकार का किसी विशेष स्थान से कोई संबंध नहीं है। अब मुस्लिम पक्ष इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार कर सकता है। Land acquired for expansion of Mahakal Lok Parisar in Ujjain; High Court denies permission for reconstruction

जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि इंदौर से करीब 50 किलोमीटर दूर उज्जैन हिंदुओं का प्रमुख धार्मिक केंद्र है जहां भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल महाकालेश्वर मंदिर के दर्शन के लिए हर रोज बड़ी तादाद में श्रद्धालु पहुंचते हैं। अधिकारियों ने बताया कि महाकालेश्वर मंदिर के पास बनाए गए महाकाल लोक परिसर के पार्किंग क्षेत्र का विस्तार करने के लिए प्रशासन ने आस-पास के इलाकों में भूमि अधिग्रहण किया था जिसके दायरे में तकिया मस्जिद की जमीन भी आ रही थी। उन्होंने बताया कि मुआवजा वितरण के बाद प्रशासन ने 11 जनवरी को तकिया मस्जिद को ढहा दिया था। याचिकाकर्ताओं के अनुसार वे करीब 200 साल पुरानी तकिया मस्जिद में नमाज पढ़ते थे और 13 दिसंबर 1985 की राजपत्र अधिसूचना में इस धार्मिक परिसर को वक्फ संपत्ति घोषित किया गया था। याचिकाकर्ताओं के वकील सैयद अशहर अली वारसी ने हाई कोर्ट में अपील पर बहस के दौरान कहा कि इस मस्जिद की जमीन का अधिग्रहण और इसे ढहाया जाना देश के संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत नागरिकों को प्रदत्त धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन है। उन्होंने यह दलील भी दी कि यह स्थापित कानून है कि एक बार किसी संपत्ति को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया जाए, तो वह हमेशा के लिए वक्फ संपत्ति ही रहती है। राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता आनंद सोनी ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को खारिज किया। उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक न्याय दृष्टान्त का हवाला देते हुए कहा कि किसी संपत्ति के अधिग्रहण के बाद उस संपत्ति का उपयोग प्रार्थना के उद्देश्य से करने का अधिकार खो भी सकता है, लेकिन यह देश के संविधान के अनुच्छेद 25 में निहित उस गारंटी के विरुद्ध नहीं है जो किसी व्यक्ति को अपने घर या अन्यत्र उसके धर्म का पालन करने का अधिकार प्रदान करती है। हाई कोर्ट की इंदौर पीठ ने रेखांकित किया कि उज्जैन की तकिया मस्जिद की जमीन का अधिग्रहण कानूनी प्रक्रिया का पालन करके किया गया है और इसके बदले भूमि अधिग्रहण अधिकारी ने मुआवजा भी प्रदान किया है। अदालत ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्याय दृष्टांत का हवाला देते हुए कहा,'चूंकि धर्म का पालन करने के अधिकार का किसी विशेष स्थान से कोई संबंध नहीं है, इसलिए मस्जिद के रूप में इस्तेमाल की जा रही किसी विशेष भूमि के अधिग्रहण से इस अधिकार का उल्लंघन होना नहीं माना जा सकता।'