रफीक खान
स्मार्ट मीटर क्या वास्तव में देश की अंतरिक्ष सुरक्षा के लिए खतरा है? करोड़ों भारतीय नागरिकों का डाटा स्मार्ट मीटर के रास्ते से जुटा कर पाकिस्तान भेजा जा सकता है? या फिर कोई और दुश्मन देश इसका गलत इस्तेमाल कर सकता है? यह सब सवाल जांच का विषय है लेकिन उक्त सवाल उठाते हुए मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने संगीन आरोप लगाए हैं। स्मार्ट मीटर कंपनी का सीधा कनेक्शन पाकिस्तान से बताते हुए उन्होंने कहा है कि इसका हेड क्वार्टर सऊदी अरब में स्थित है। The electricity department's smart meters pose a significant threat to the country's internal security, with the company's headquarters in Saudi Arabia.
पत्रकारों से चर्चा करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अनूपपुर के दौरे पर गए थे। वहां कई परिवारों ने उनसे शिकायत की गर्मी में 500 रुपए आने वाला बिजली का बिल अब 5 हजार रुपए आता है। ये स्मार्ट मीटर (Smart Meter) नहीं बल्कि जासूसी के मीटर हैं। उन्होंने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि ये स्मार्ट मीटर देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं। इन्हें 2020 की अधिसूचना के बाद से स्थापित किया जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश सरकार से सवाल पूछा है कि मैं पूछना चाहता हूं कि कौन सी विदेशी कंपनी है? 24 लाख मीटर एमपी में लगे हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी कौन सी है, देश की या विदेश की? क्या पाकिस्तानी लोग हैं? उन्होंने कहा कि कंपनी का नाम अफनार है और इसका मुख्यालय सऊदी अरब में है। उनका कहना है कि दोनों कंपनियां मध्य प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगा रही हैं। पश्चिम क्षेत्र में ठेका भी निरस्त किया, कागज पूरे नहीं थे। 897 करोड़ का ठेका था। मध्य क्षेत्र में 1100 करोड़ का ठेका दिया। कुल करीब 2 हजार करोड़ का ठेका दिया है। उमंग सिंघार ने सवाल उठाया कि अगर कंपनी के तार पाकिस्तान से जुड़े हैं, तो ठेका क्यों दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कंपनी के कई अधिकारियों का पाक से कनेक्शन है, वे मूल रूप से पाकिस्तानी नागरिक हैं। यहीं नहीं उन्होंने कहा कि भारत में दस्तावेज प्रक्रिया में लापरवाही करने वाली कंपनी के साथ भारत सरकार ने एग्रीमेंट किया। उन्होंने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी बात करते हैं कि पाकिस्तान के साथ बिजनेस नहीं करेंग और पीछे के रास्ते से पाकिस्तान की मदद की जा रही है।
