रफीक खान
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कफ सिरप पीने से 11 बच्चों की मौत के बाद अस्पताल के डॉक्टर प्रवीण सोनी को गिरफ्तार कर लिया गया है। छिंदवाड़ा के परासिया से डॉक्टर सोनी की गिरफ्तारी हुई है। कफ सिरप के इस प्रकरण ने सरकार के पूरे सिस्टम को आमजन के सामने निर्वस्त्र कर दिया है। हर निर्माण कार्य में क्वालिटी कंट्रोल नाम की एक स्टेज होती है, जिससे निर्मित होने वाले प्रोडक्ट की गुणवत्ता परखी जाती है। उसमें मिलाई जाने वाले सामग्री के कम और ज्यादा की पहचान होती है। फिर जो वस्तु दवाई के रूप में तैयार की जा रही है, उसके लिए जिम्मेदारी के साथ अतिरिक्त संवेदनशीलता बरती जाती है। इस सबके बावजूद एक दवा फैक्ट्री तक जहर पहुंचता है, जहर से दवा तैयार होती है, यह जहरीली दवा खुले आम बाजार में बिकती है और सरकारी अस्पताल तक पहुंच जाती है। सरकारी अस्पताल में डॉक्टर मरीज को यह जहर डिलीवर करते हैं और उपयोग करने वाले सारे लोग मौत की नींद सोते चले जाते हैं। जब 11 मौतें एक ही अस्पताल, एक ही शहर में सामने आती है तो हड़कंप मच जाता है और फिर पूरा सिस्टम तहस-नहस नजर आता है। आनन-फानन में FIR, जांच, प्रतिबंध और न जाने किस-किस तरह के एक्शन की दरकार सुनाई देने लगती है। जबकि सच पूछा जाए तो जांच यहां से होना चाहिए कि आखिर दवा फैक्ट्री में जहर पहुंचा क्यों? जहर से दवा क्यों तैयार की गई? अगर किसी जहर से कोई रासायनिक क्रिया कर दवा बनाई भी जाती है तो जहर और दबा के बीच अंतर स्पष्ट होना चाहिए? मानव जीवन पर इस दवा के जहर का कितना असर होगा उसका भी एक्सपर्ट खुलासा होना चाहिए? जो कारोबार बिना लाइसेंस के कोई शुरू नहीं कर सकता, वहां जहर का खुला खेल क्यों? किसकी शह पर चल रहा था? इस तरह के अनगिनत सवाल है, जो सरकार की तरफ से ईमानदारी के साथ किए जाना चाहिए। उनके ही जवाब सिस्टम में जिम्मेदारी भी सुनिश्चित करेंगे और सुधार में भी कारगर साबित होंगे। The system is very pathetic, poison kept being produced, kept being sold openly in the market, kept reaching hospitals also... and
सरकार के हवाले और मंशा अनुसार मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इस घटना के बाद राज्य सरकार एक्शन में आई है। पीड़ितों द्वारा ली गई कफ सिरप की जांच लैब में की गई, जिसमें पाया गया कि इस सिरप में एक जहरीला केमिकल है। इस जानकारी के सामने आने के बाद मध्य प्रदेश में इस कफ सिरप की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। राज्य के छिंदवाड़ा से इस दवा का सुझाव देने वाले चिकित्सक को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। छिंदवाड़ा के परासिया से गिरफ्तार डॉक्टर प्रवीण सोनी जाने-माने बाल रोग विशेषज्ञ हैं। सर्दी और बुखार से पीड़ित बच्चों के की दवाइयों में उन्होंने कोल्ड्रिफ कफ सिरप पिलाने का सुझाव दिया था। इसी कफ सिरप के सेवन के बाद कई बच्चे बीमार गंभीर रूप से बीमार हो गए और उनकी मौत हो गई। किसी भी मामले में जांच और कार्रवाई का दायरा सीमित नहीं होता है लेकिन इसकी असीमित्ता के बावजूद इसे एक संकुचित दायरे में रख देना पूरी तरह से ना इंसाफी है। कफ सिरप का ये मामला क्या सिर्फ पैसे कमाने के चल रहे ढर्रे से जुड़ा हुआ है या फिर वाकई में कोई बड़ी साजिश है? इस तरह का कोई भी बिंदु जांच में छोड़ा नहीं जाना चाहिए।
