बसंत पंचमी पर जुमे की नमाज और पूजा के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला, समुचित सुरक्षा व्यवस्था के दिए निर्देश - khabarupdateindia

खबरे

बसंत पंचमी पर जुमे की नमाज और पूजा के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला, समुचित सुरक्षा व्यवस्था के दिए निर्देश


रफीक खान
मध्य प्रदेश के धार जिले में ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने पसंद पंचमी के दिन पूजा और नमाज दोनों की अनुमति प्रदान की है। साथ ही सरकार को समुचित इंतजाम करने के निर्देश भी दिए हैं। कोर्ट ने दोनों समुदायों को शांति बनाए रखने और एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करने की सलाह भी दी है। बसंत पंचमी के एक दिन पहले गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सरकार ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम करने और शांति और सौहार्द बरकरार रखना के प्रयास शुरू कर दिए हैं। Supreme Court issues order for Friday prayers and puja on Basant Panchami, directs for adequate security arrangements

जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि धार की भोजशाला को हिंदू पक्ष मां सरस्वती का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। बसंत पंचमी के दिन यहां विशेष पूजा का आयोजन होता है। इस वर्ष बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ने से जुमे की नमाज भी उसी दिन निर्धारित थी, जिससे विवाद की स्थिति बन गई। हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि बसंत पंचमी के दिन मुस्लिम समुदाय को नमाज की अनुमति न दी जाए और केवल हिंदुओं को पूजा-अर्चना करने दी जाए। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने सुनवाई करते हुए संतुलित आदेश दिया। अदालत ने कहा कि सरस्वती पूजा और नमाज दोनों होंगी। वहीं नमाज के लिए दोपहर 1 से 3 बजे का समय निर्धारित किया गया है। जबकि नमाज के लिए परिसर में अलग स्थान तय किया जाएगा। पूजा के लिए अलग व्यवस्था भी की गई है। दोनों समुदायों के लिए विशेष पास सिस्टम लागू होगा। बैरिकेडिंग और अलग-अलग प्रवेश-निकास मार्ग बनाए जाएंगे। प्रशासन को कड़े सुरक्षा इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने दोनों पक्षों से आपसी सम्मान, संयम और सहयोग बनाए रखने की अपील भी की। वकील विष्णु शंकर जैन ने तर्क दिया कि सरस्वती पूजा सूर्योदय से सूर्यास्त तक चलती है, इसलिए पूरे दिन पूजा का अधिकार मिलना चाहिए। वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा कि जुमे की नमाज केवल तीन घंटे की होती है और समुदाय न्यूनतम समय में नमाज अदा कर स्थल खाली कर देगा। उन्होंने पहले भी ऐसे मौकों पर शांतिपूर्ण व्यवस्था का हवाला दिया।