रफीक खान
शहर के प्रख्यात अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अखिलेश गुमाश्ता के अथक प्रयासों से स्थानीय मानस भवन में चतुर्थ वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस का भव्य और गरिमामय शुभारंभ शुक्रवार को हुआ। तीन दिवसीय इस विश्व स्तरीय आयोजन में पहुंचे तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि रामचरितमानस को राष्ट्र ग्रंथ घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज देश में ओम शांति-शांति नहीं, बल्कि क्रांति-क्रांति का बोलबाला है।Swami Rambhadracharya said at the fourth World Ramayana Conference that Ramcharitmanas should be declared a national text.
शुक्रवार को जबलपुर के मानस भवन जबलपुर में चतुर्थ वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस का भव्य शुभारंभ श्रद्धा, संस्कृति और शोध के अद्भुत संगम के साथ हुआ। कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी की पावन उपस्थिति में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया। इस अवसर पर केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत शाश्वत अतिथि के रूप में तथा लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह कार्यक्रम अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे। प्रातः 9 बजे हाल-1 में कुलजीत सिंह एवं उनकी टीम द्वारा शब्द कीर्तन से सत्र-1 की शुरुआत की गई। इसके पश्चात 10 से 11 बजे तक “राम कथा: प्राचीन ज्ञान से वैश्विक दृष्टिकोण तक” विषय पर श्रीलंका के बाला राव, जबलपुर की प्रोफेसर नीना उपाध्याय एवं सुखदेव सिंह मिन्हास ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। विभिन्न सत्रों में देश-विदेश से आए विद्वानों ने रामायण से जुड़े विविध विषयों पर अपने शोध विचार साझा किए।
पुस्तक विमोचित
दोपहर 12:30 बजे श्रीराम यात्रा पथ पर यायावर विचार जी की पुस्तक “जहँ जहँ राम चरण चलि जाहि” का विमोचन किया गया। जानकी महल जनकपुर नेपाल से पधारे महंत पूज्य रामरोशनदास जी ने भी अपने विचार रखे।
CM बोले आज भी समाज को दिशा दे रहा ग्रंथ
उद्घाटन सत्र में आयोजन अध्यक्ष अजय बिश्नोई ने अतिथियों का स्वागत करते हुए वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस की अवधारणा, उद्देश्य एवं वैश्विक प्रभाव पर प्रकाश डाला। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में रामायण को भारतीय जीवन मूल्यों की आत्मा बताते हुए कहा कि यह ग्रंथ आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रहा है। केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, संस्कृति मंत्री मध्य प्रदेश शासन धर्मेंद्र सिंह लोधी एवं कार्यक्रम अध्यक्ष राकेश सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।इस अवसर पर परम पूज्य ज्ञानेश्वरी दीदी, साध्वी मैत्री दीदी, साध्वी मनीषा दीदी विनोद गोटिया, संजय यादव, राघवेन्द्र गुमास्ता,पंकज गौर, एडवोकेट रविरंजन श्रीवास्तव, अशोक मनोध्या, राकेश पाठक, आलोक पाठक, जिला शिक्षा अधिकारी घनश्याम सोनी, योगेन्द्र शर्मा एवं बड़ी संख्या में संस्कारधानी उपस्थित रहे।
चीनी और इंडोनेशियाई रामायण
कार्यक्रम में चीन से पधारी जोया जेंग ने ज्ञानेश्वरी दीदी को चाइनीज गीता एवं इंडोनेशिया से ने संस्कृति मंत्री मध्य प्रदेश शासन धर्मेंद्र सिंह को इंडोनेशिया रामायण भेंट की। इसके पश्चात जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य जी के प्रेरणादायी प्रवचन हुए।
बिखरी सांस्कृतिक छटा
रात्रि 7:30 से 8 बजे तक “कवि कोविद कहि सके कहां ते” कार्यक्रम में कवि सुदीप भोला एवं रामायण द्विवेदी (अयोध्या) की प्रस्तुति ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद श्रीलंका के डान डिनेश कुमार द्वारा रावण के संगीत वाद्य यंत्रों का वादन तथा पटना की नाटक मंडली द्वारा भरत चरित्र पर आधारित नाट्य प्रस्तुति ने भाव-विभोर कर दिया।
रेत पर बनाया राम मंदिर
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण ओडिशा के पुरी से पधारे प्रसिद्ध सैंड आर्टिस्ट गोपाल चरण सामल रहे, जिनका यह प्रथम जबलपुर आगमन था। उनके द्वारा रेत पर निर्मित राम मंदिर ने दर्शकों का मन मोह लिया। उनकी अद्भुत सैंड आर्ट को उपस्थित जनसमूह ने मुक्त कंठ से सराहा।राम और रामायण डाक टिकट संग्रह: जबलपुर के श्री सतीश श्रीवास्तव द्वारा लगभग 25 देशों के राम एवं रामायण विषयक डाक टिकटों का दुर्लभ संग्रह प्रदर्शित किया गया। श्याम नारायण तिवारी द्वारा राम मंदिर से संबंधित समाचार पत्रों का संग्रह दर्शकों को आकर्षित कर रहा है।
देगाल्डरुआ शैली में हनुमान चालीसा
श्रीलंका की प्राचीन देगाल्डरुआ कला शैली में सजी हनुमान चालीसा पेंटिंग्स विशेष आकर्षण बनी हुई हैं। शैलजा सुल्लेरे ने बताया कि 18वीं सदी की इस शैली में प्राकृतिक खनिज एवं मिट्टी से बने रंगों का उपयोग कर कथा को अलग-अलग पट्टों में उकेरा जाता है, जिसमें तुलसीदास कृत हनुमान चालीसा को प्रतीकात्मक रूप में जीवंत किया गया है। कॉन्फ्रेंस में चाय-कॉफी की व्यवस्था पंजाबी महासंघ जबलपुर के मनोज नारंग, राकेश महाजन एवं नितिन भाटिया द्वारा की गई।
सांय 5:30 से 6:00 बजे तक कबि कोविद कहि सके कहां ते, कवी सुदीप भोला एवं टीम के द्वारा प्रस्तुति, सांय 6 से 7 बजे तक आध्यात्मिक सत्र जिसमें तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज एवं संत सन्निधि साध्वी प्रज्ञा भारती जी के प्रवचन, रात्रि 7 से 8: 15 तक मणिपुरी रामलीला का मंचन, रात्रि 8:15 से 9:15 तक कुमारी ईशिता विश्वकर्मा के भजनों का आयोजन।
सुबह के कार्यक्रम- सुबह 9:30 से 5 सांय 5:30 तक रामायण से संबंधित विषयों पर विभिन्न विद्वानों के द्वारा अपने विचार एवं शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे इसमें श्रीलंका, थाईलैंड त्रिनिदाद,टोबैगो, मारीशस,चीन एवं वियतनाम के रामायण विद्वान शामिल होंगे।

