रफीक खान
मध्य प्रदेश के रीवा जिले से अलग होकर नए जिले के रूप में स्थापित हुए मऊगंज से निर्वाचित भारतीय जनता पार्टी के विधायक प्रदीप पटेल को बीती रात लोगों के भारी आक्रोश का शिकार होना पड़ा। धरने पर बैठे प्रदीप पटेल के खिलाफ जोरदार नारेबाजी प्रदर्शन के साथ ही उन्हें खदेड़ दिया गया। मौके पर अगर पुलिस नहीं होती तो विधायक को सुरक्षित निकाल पाना बड़ा मुश्किल हो जाता। विधायक प्रदीप पटेल लगातार धरने बाजी से सुर्खियों में रहते हैं। कभी पुलिस तो कभी किसी घटना दुर्घटना या जमीन विवाद के मामले में उनका नाम जुड़कर सामने आता रहता है। The MLA had to face the anger of the people in his own assembly constituency, if the police had not been there the situation would have worsened.
जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि मामला मऊगंज बायपास पर देर रात देखने को मिला। कड़कड़ाती ठंड में प्लास्टिक की पन्नी के नीचे धरने पर बैठे भाजपा विधायक प्रदीप पटेल को शायद इस बात का अंदाजा नहीं था कि, उन्हें कुछ ही देर में यहां ग्रामीणों की भारी नाराजगी का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस नेता विनोद मिश्रा के पक्ष में खड़े विधायक ने जैसे ही दूसरे पक्ष के लल्लू पाण्डेय को पुलिस के जरिए थाने भिजवाया, ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। स्थितियां इतनी बिगड़ गई कि, मौके पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई, जिसने भाजपा विधायक को चारों तरफ से घेर लिया। चारों तरफ से 'प्रदीप पटेल मुर्दाबाद' के नारे गूंजने लगे। ग्रामीणों ने विधायक से तीखे सवाल पूछे कि, आखिर कोर्ट में लंबित मामले में वे दखल क्यों दे रहे हैं? स्थिति तब और गंभीर हो गई जब लल्लू पाण्डेय के परिवार ने आत्मदाह की कोशिश की। इसके बाद गुस्साई भीड़ ने विधायक को दो-टूक कहा कि, 'ये हमारी जमीन है, आप यहां से बाहर जाएं। ग्रामीणों के उग्र तेवर देख पुलिस प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। पुलिसकर्मियों ने घेरा बनाकर विधायक को भीड़ से बाहर निकाला, लेकिन आक्रोशित लोगों ने विधायक की गाड़ी तक रोक ली। भीड़ में विधायक को खूब खरी-खोटी सुनाई। राजनीतिक हलके में एक कांग्रेसी नेता के पक्ष में मैदान में उतरे बीजेपी विधायक प्रदीप पटेल को लेकर खूब चर्चाएं हो रही हैं।
