रफीक खान
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में कलेक्टर अंशुल गुप्ता द्वारा एक आदिवासी छात्रावास के निरीक्षण के दौरान जो दुर्दशा की तस्वीर देखी, उससे वो भड़क गए। मौके पर ही छात्रावास अधीक्षक को जमकर फटकार लगा डाली। कलेक्टर ने यहां तक कह डाला कि तुमको अभी दो जूते मारूंगा तो सुधर जाओगे। छात्रावास की तमाम अव्यवस्थाएं, बदहाली और जिम्मेदार अधिकारी की गैर जिम्मेदारी कलेक्टर के जूते मारने की धमक से अब दबकर रह गई है। लापरवाह छात्रावास अधीक्षक समेत अनेक दिशाओं से सिर्फ कलेक्टर के विरोध की आवाज गूंज रही है। The threat of shoes has suppressed misery, negligence and irresponsibility, now all around is the Collector's anger.
जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि विदिशा कलेक्टर अंशुल गुप्ता बुधवार दोपहर उदयपुर स्थित शासकीय आदिवासी बालक आश्रम पहुंचे। वहां का नजारा देख उनका पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने पाया कि आश्रम में बच्चे मौजूद नहीं थे। जब उन्होंने इस बारे में छात्रावास अधीक्षक चैन सिंह चिढ़ार से जवाब मांगा तो अधीक्षक ने बताया कि क्षेत्र में चल रही शीतलहर के कारण दो दिन की छुट्टी घोषित की गई थी, इसलिए बच्चे अपने घर चले गए। यह जवाब सुनकर कलेक्टर गुप्ता इतने नाराज हुए कि उन्होंने वहां मौजूद अन्य अधिकारियों के सामने ही अधीक्षक को अपशब्द कहे और कहा कि अभी तुम्हें 2 जूते मारूंगा। कलेक्टर के इस व्यवहार से जिले के अन्य सरकारी कर्मचारियों में भी नाराजगी है। अपमान से दुखी होकर चिढ़ार ने मौके पर ही मुख्यमंत्री के नाम एक शिकायती पत्र तैयार किया है। कलेक्टर का आपा खोना उनके लिए एक तरह से विरोध रूपी मुसीबत का सबब बन गया। आदिवासी छात्रावास के अन्य कर्मचारी व समर्थक कर्मचारी संगठन भी गैर जिम्मेदारी की चर्चा ना करते हुए कलेक्टर को मर्यादा का पाठ पढ़ाने में जुट गए हैं।
