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Friday, 27 February 2026

अग्रिम जमानत पर फैसला किया सुरक्षित, तालियां बज गई अदालत मे, दोनों पक्षों की ओर से 1 घंटे चली बहस


रफीक खान
सनातन धर्म के सबसे बड़े गुरुओं में से एक शंकराचार्य स्वामी अभीमुक्तेश्वरआनंद की गिरफ्तारी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। हाई कोर्ट का यह निर्णय जैसे ही पटेल पर आया तालियां बजने लगी। जमानत संबंधी याचिका पर हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है। शंकराचार्य पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज हुए मुकदमे के चलते परेशान है। उत्तर प्रदेश पुलिस उनकी गिरफ्तारी करे, इसके पहले ही उन्होंने हाईकोर्ट का रुख कर लिया और हाई कोर्ट से अंतरिम राहत शंकराचार्य को मिल गई है। The decision on anticipatory bail was reserved, leading to applause in the courtroom, with both sides arguing for an hour.

जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि ज्योतिर्मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने पक्ष रखा तो शंकराचार्य की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ. पीएन मिश्र और इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता दिलीप गुप्ता ने अदालत के सामने तर्क प्रस्तुत किया। शंकराचार्य के अधिवक्ता डॉ. पीएन मिश्र और दिलीप गुप्ता ने दलील दी कि पीड़ित का मुकदमा संरक्षक के जरिए दर्ज कराया है। उसके माता-पिता कोई अता-पता ही नहीं है। सरकार के वकील ने कहा कि असाधारण हालात में ही अग्रिम जमानत सीधे हाईकोर्ट आ सकती है। इस मामले में असाधारण जैसा कुछ नहीं है। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह कोई अनिवार्य बाधा नहीं है।शंकराचार्य के वकील ने कहा कि शंकराचार्य के खिलाफ पहले 18 जनवरी को अमावस्या के दिन हुई मारपीट की अर्जी दी गई। इस पर केस दर्ज नहीं हुआ तो पॉक्सो वाली अर्जी दाखिल कर दी गई। यह दो अर्जी ही आपस में भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है। यह मामला साजिश के तहत दर्ज कराया गया है, जो किसी के दबाव की ओर ईशारा कर रहा है। कहा कि शंकराचार्य पर केस दर्ज कराने वाला खुद हिस्ट्रीशीटर है। उसके ऊपर गौ तस्करी, गौ हत्या, सामूहिक दुष्कर्म, जालसाजी, गैंगस्टर, गुंडा एक्ट का केस दर्ज है। वह 25 हजार रुपये का इनामी रहा है। उसकी हिस्ट्रीशीट 27 ए है। नाबालिगों को अब तक बाल कल्याण समिति को क्यों नहीं सौंपा गया। बच्चों के मां-बाप कहां हैं। इस पर कोर्ट ने सरकार के अधिवक्ता से पूछा कि बच्चे कहां हैं? इसके अलावा भी आरोप से लेकर इन्वेस्टिगेशन तक पर कई सवाल उठाए गए।