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Saturday, 28 February 2026

अदालत के फैसले के बाद ED की कार्रवाई का क्या होगा, केजरीवाल ने 6 महीने सिसोदिया ने डेढ़ साल काटी जेल


रफीक खान
अंततः सबूत के अभाव में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को शराब घोटाला मामले में बरी कर दिया। उनके साथ 21 अन्य आरोपियों को भी सेंट्रल ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन CBI के केस से बरी कर दिया गया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने 598 पेज के आदेश में यह साफ तौर पर उल्लेख किया कि CBI ने जो केस बनाया था, उसके लिए सीबीआई सबूत पेश नहीं कर पाई। अदालत के इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी ने जहां जश्न मनाया, वहीं एक सवाल यह भी खड़ा हो गया कि प्रवर्तन निदेशालय ED द्वारा की जा रही जांच और कार्रवाई का इस आदेश के संदर्भ से क्या फायदा मिल पाएगा? What will happen to ED's action after the court's decision? Kejriwal spent 6 months in jail, Sisodia spent one and a half years in jail.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कहा जाता है कि शराब घोटाले को लेकर जमकर राजनीति हुई। आरोपित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के निर्देश पर सिटिंग चीफ मिनिस्टर अरविंद केजरीवाल को आरोपी बनाकर जेल भेज दिया गया। अरविंद केजरीवाल 6 माह और डिप्टी चीफ मिनिस्टर मनीष सिसोदिया डेढ़ साल जेल में रहे। अब सवाल अभी भी बना हुआ है कि कथित शराब पॉलिसी घोटाले में एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) के मनी लॉन्ड्रिंग केस का क्या होगा। क्या CBI के डिस्चार्ज का ED केस पर भी असर पड़ेगा? कथित एक्साइज पॉलिसी घोटाले में ED ने अरविंद केजरीवाल को तब भी समन भेजा था जब CBI केस में उनका नाम आरोपी के तौर पर नहीं था। ED ने तर्क दिया था कि मनी लॉन्ड्रिंग एक अलग मामला है। हालांकि ED के अपराध असल में अपराध से जुड़े होते हैं। इसका मतलब है कि ED का मामला जरूरी तौर पर अपराध से ही शुरू होना चाहिए। जब कोई कोर्ट आरोपी को बरी कर देता है, तो ED का मामला नहीं चल सकता। इस घटनाक्रम से साईंटेशन मेल खाता है। सुप्रीम कोर्ट ने लगातार विजय मदनलाल चौधरी के फैसले को लागू करते हुए कहा है कि एक बार जब आरोपी को संबंधित अपराध में बरी कर दिया जाता है, तो मनी लॉन्ड्रिंग केस नहीं चल सकता। उधर सीबीआई ट्रायल कोर्ट के फैसले को जल्द ही हाईकोर्ट में चुनौती देगी और अरविंद केजरीवाल तथा मनीष सिसोदिया को उलझाए रखने की कोशिश करेगी।