रफीक खान
कौन बनेगा करोड़पति फेम के रूप में चर्चाओं में आई तहसीलदार अमित सिंह तोमर को पुलिस कभी भी गिरफ्तार कर सकती है। तहसीलदार अमिता सिंह तोमर पर आरोप है कि उन्होंने बाढ़ राहत की राशि 2 करोड़ 57 लाख के करीब 127 फर्जी खाते खुलवाकर और 100 से ज्यादा दलालों व 25 पटवारी के साथ मिलकर घोटाला किया है। मामले में पहले हाईकोर्ट ने और अब सुप्रीम कोर्ट ने भी जमानत देने से इनकार कर दिया है। इसके बाद तहसीलदार के पास दो ही रास्ते हैं या तो वह सरेंडर करें या पुलिस अपने तरीके से गिरफ्तार कर ले। After the High Court, the Supreme Court also refused bail to 27 Patwaris in the multi-crore flood relief scam.
जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि मामला वर्ष 2021 में आई भीषण बाढ़ के बाद राहत राशि वितरण से जुड़ा है। बड़ौदा तहसील क्षेत्र में 794 प्रभावित हितग्राहियों का आकलन किया गया था। सरकार द्वारा आर्थिक सहायता दी जानी थी, लेकिन जांच में सामने आया कि 127 फर्जी बैंक खातों में लगभग 2 करोड़ 57 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। ऑडिट में गड़बड़ी सामने आने के बाद जांच शुरू हुई। प्रारंभिक जांच में कई स्तरों पर अनियमितताएं पाई गईं। तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर की जांच के बाद कई लोगों को आरोपी बनाया गया और कुछ मामलों में राशि की वसूली भी की गई। विस्तृत जांच तत्कालीन एसडीओपी प्रवीण अष्ठाना ने की, जिसमें 25 पटवारियों सहित कुल 110 लोगों को आरोपी बनाया गया। इसी सूची में अमिता सिंह तोमर का नाम भी शामिल था, जो उस समय बड़ौदा में तहसीलदार थीं।
