रफीक खान
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से निर्वाचित कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज की कथित फर्जी सेल डीड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जितेंद्र कुमार माहेश्वरी तथा जस्टिस अतुल चांदूरकर की युगल पीठ ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें भोपाल पुलिस कमिश्नर को तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। हाई कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को एसआईटी गठित करने के लिए भी निर्देशित किया था। विधायक आरिफ मसूद की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट तथा राज्यसभा सांसद विवेक कृष्ण तन्खा द्वारा बहस की गई। The MP High Court had issued an order to the Bhopal Police Commissioner in the alleged fake sale deed case of Indira Priyadarshini College.
जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि हाई कोर्ट द्वारा किए गए उक्त आदेश को आरिफ मसूद ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार का जवाब आने से पहले इस तरह के अंतरिम आदेश की जरूरत नहीं थी। हाई कोर्ट ने आदेश में कड़ी शर्तें लगाईं और पुलिस कमिश्नर को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया। पहली नजर में यह ऑब्जर्वेशन सही नहीं है।सुप्रीम कोर्ट में आरिफ मसूद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि हाई कोर्ट ने मामले में सरकार का जवाब आने से पहले ही एफआईआर दर्ज करने और एसआइटी गठित करने का आदेश दिया, जो कि अनुचित है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि याचिका हाई कोर्ट में पेंडिंग है, इसलिए सभी पक्षों को निर्देश दिया जाता है कि वे अपनी-अपनी दलीलें जल्द से जल्द पूरी करें और इसमें शामिल मुद्दों पर हाई कोर्ट द्वारा अपने मेरिट के आधार पर फैसला सुनाया जाए। उल्लेखनीय है कि इंदिरा प्रियदर्शी कालेज भोपाल की मान्यता निरस्त किए जाने के विरुद्ध कांग्रेस विधायक मसूद हाई कोर्ट पहुंचे थे। जहां से राहत मिलने के स्थान पर एफआईआर के निर्देश की गाज गिर गई। मप्र शासन, उच्च शिक्षा विभाग ने इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज की जांच के उपरांत नौ जून 2025 को मान्यता निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया था।
