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Tuesday, 28 April 2026

महिला कर्मचारी को फटकार लगाने से शुरू हुआ विवाद, ब्यूरोक्रेसी ने मुख्यमंत्री तक पहुंचा पूरा मामला


रफीक खान
मध्य प्रदेश में चंबल क्षेत्र के विधायक और आईपीएस अधिकारी में हुई कहासुनी के बाद महाकौशल क्षेत्र के जबलपुर में पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर तथा एक आईएएस अधिकारी के बीच जंग शुरू हो गई है। जबलपुर स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने सरकारी कामकाज की समीक्षा के दौरान एक महिला कर्मचारी को फटकार लगा दी, बस यहीं से विवाद शुरू हो गया। महिला कर्मचारी ने इसे प्रेस्टीज इशू बनाया और सिख समाज तथा मंत्री जी तक अपनी बात पहुंचा दी। मंत्री जी ने भी शिकायत को गंभीरता से लिया और आईएएस अधिकारी को बंगले बुलाकर लताड़ दिया। आईएएस अधिकारी की प्रतिष्ठा और स्वाभिमान आहत हुआ तो उन्होंने मामला आईएएस संगठन तक पहुंचा दिया। ब्यूरोक्रेसी ने पूरे मामले की जानकारी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को दे दी है। कर्मचारी का आरोप है कि अधिकारी ने उसे बेवजह अभद्र व्यवहार करते हुए बेइज्जत किया। मंत्री जी का कहना है कि अधिकारी की शैली संयमित होना चाहिए और महिला कर्मचारी से किया गया उनका व्यवहार पूरी तरह अनुचित था। उधर अधिकारी की शिकायत है कि मंत्री जी ने बंगले में बुलाकर आधे घंटे तक मानसिक प्रताड़ना दी। पूरे मामले का अंत कब, कहां और किस तरह से होगा? यह देखने वाली बात है। The controversy began with the reprimand of a female employee, and the bureaucracy escalated the matter to the Chief Minister.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कहा जाता है कि 17 मार्च 2026 को अरविंद शाह ने जबलपुर स्मार्ट सिटी CEO का प्रभार संभाला। इसके बाद उन्होंने कार्यालय में अनुशासन सख्त करते हुए उपस्थिति की जांच कराई। इसमें 6 कर्मचारी अनुपस्थित मिले, जिनमें दिलप्रीत कौर भल्ला भी शामिल थीं। जवाब नहीं मिलने पर उनका वेतन रोक दिया गया। 22 अप्रैल को शाह ने दिलप्रीत कौर को पूछताछ के लिए बुलाया। इसी के कुछ घंटों बाद मंत्री राकेश सिंह ने उन्हें अपने आवास पर तलब कर लिया।आरोप है कि मंत्री आवास पर अरविंद शाह गुलदस्ता लेकर पहुंचे थे, जहां करीब 30 मिनट तक उनके साथ अभद्र भाषा में बात की गई। उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। उनके चयन पर सवाल उठाए गए। सिंगरौली तक परेड कराकर भेजने जैसी बात कही गई। एमपी आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष मनु श्रीवास्तव द्वारा पूरे मामले से मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया है और कड़ी आपत्ति जताई है। इस मामले ने जिस तेजी के साथ तूल पकड़ा है, अब प्रदेश के मुखिया भी उतनी ही गंभीरता के साथ निराकरण करें ताकि जबलपुर के हितों पर कोई बाधा न पहुंचे।