रफीक खान
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलप्पीठ ने भारतीय जनता पार्टी के विधायक तथा कटनी के माईनिंग कारोबारी संजय पाठक के खिलाफ आपराधिक अवमानना प्रकरण दर्ज करने के आदेश दिए हैं। यह कार्रवाई माईनिंग मामलों से संबंधित एक पिटीशन की सुनवाई के बीच विधायक संजय पाठक द्वारा हाई कोर्ट के जस्टिस विशाल मिश्रा से सीधे मोबाइल पर बात कर अप्रोच की जानकारी लगने के बाद चीफ जस्टिस ने स्वत: संज्ञान में ली और खुद ही कंप्लेंनेंट बनकर इसके आदेश जारी किए। गुरुवार को हुए इस आदेश के बाद भाजपा खेमे में खलबली सी मच गई। A High Court judge was approached directly by phone in a mining-related case, and the Chief Justice's bench took cognizance.
उल्लेखनीय है कि अवैध खनन मामले से जुड़ी याचिका मूल रूप से कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित उर्फ मनु द्वारा लगाई गई है। सुनवाई के दौरान जस्टिस विशाल मिश्रा ने बताया कि विधायक ने उनसे फोन पर चर्चा करने की कोशिश की, जिसके बाद उन्होंने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। पाठक परिवार से जुड़ी कंपनियों (आनंद माइनिंग, निर्मला मिनरल्स) द्वारा 443 करोड़ रुपये के कथित अवैध खनन से संबंधित है। हाई कोर्ट ने विधायक के इस कृत्य को अनुचित और न्यायिक प्रक्रिया में दखल माना है। याचिका करता के अधिवक्ता अरविंद श्रीवास्तव ने उक्त आदेश की जानकारी मीडिया को देते हुए कहा कि मामले में चीफ जस्टिस खुद शिकायतकर्ता बने हैं और उन्होंने दुर्गा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इस मामले में याचिका करता आशुतोष दीक्षित उर्फ मनु का कहना है कि महाकौशल और मध्य प्रदेश की खनिज संपदा को विधायक संजय पाठक जैसे माफिया लूट कर प्रदेश के राजस्व को पिछले दो दशकों से चपत लगा रहे हैं।
ऐसे माफिया तत्वों के कारण मध्य प्रदेश के खनिज उद्योग में निवेशक अपनी सहभागिता नहीं कर रहे हैं और प्रदेश को लगातार पीछे धकेल रहे हैं । हम न्यायपालिका का धन्यवाद करते हैं और इस लड़ाई को पूरी ईमानदारी से लड़ने के लिए कृतसंकल्पित हैं।
