सुप्रीम कोर्ट ने गठित की SIT, होंगे बड़े खुलासे, पूरे देश में चल रहा बड़ा रैकेट, औने-पौने दामों पर बेची बेशकीमती जमीन - khabarupdateindia

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सुप्रीम कोर्ट ने गठित की SIT, होंगे बड़े खुलासे, पूरे देश में चल रहा बड़ा रैकेट, औने-पौने दामों पर बेची बेशकीमती जमीन


रफीक खान
विश्व प्रसिद्ध योग गुरु तथा खासतौर से मध्यप्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर की अहम शख्सियत रहे महर्षि महेश योगी की संस्था स्पिरिचुअल जेनरेशन मूवमेंट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (एसआरएमएएफ) के जमीन फर्जीबाड़े मामले में बड़ा एक्शन हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में दायर एक क्रिमिनल अपील की सुनवाई उपरांत दिए गए एसआईटी गठन के आदेश और इस बीच प्रवर्तन निदेशालय ED की टीम द्वारा नोएडा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा छत्तीसगढ़ के विभिन्न इलाकों में छापा मार कार्रवाई के बाद मास्टरमाइंड जी रामचंद्र मोहन सहित पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। लंबे समय से करोड़ों रुपए की बेशकीमती जमीन को औने-पौने दामों में बेचने का गोरख धंधा चल रहा था। मामले में एक जमीन खरीदने वाले को भी आरोपी बनाया गया है। ऐसा माना जा रहा है कि प्राइवेट लोगों के अलावा बड़े सरकारी अफसरों की भी गिरफ्तारी SIT तथा प्रवर्तन निदेशालय ED की टीमें कर सकती हैं। The Supreme Court has formed an SIT, revealing significant revelations. A massive racket is operating across the country, selling valuable land at throwaway prices.

जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि संस्थान के श्रीकांत ओझा द्वारा सुप्रीम कोर्ट में एक क्रिमिनल अपील दायर की गई थी। इस क्रिमिनल अपील की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जितेंद्र कुमार माहेश्वरी तथा जस्टिस अतुल एस चांदूरकर द्वारा करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को निर्देश दिए गए। इन्हीं निर्देशों के बाद तत्काल SIT का गठन कर दिया गया। साथ ही प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने भी जांच पड़ताल और गिरफ्तारियां शुरू कर दी। एसआईटी को 3 महीने के भीतर अपनी फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट सौंपना है। मामले में मनी लॉड्रिंग रोकथाम कानून (पीएमएलए) के तहत कार्रवाई करते हुए एनसीआर में पांच स्थानों पर छापा मारा गया। एसआरएमएफ की करोड़ों की जमीन बेचने वालों में दो प्रमुख साजिशकर्ता की पहचान हो गई है। इनमें मास्टरमाइंड जी रामचंद्र मोहन दिल्ली के नारायण विहार का रहने वाला है तथा ज्यादातर समय छत्तीसगढ़ के भिलाई में बिताता है। दूसरा आकाश मालवीय भी नारायण विहार में ही रहता है। तिलपताबाद गांव में 3.36 एकड़ जमीन फर्जी तरीके से खरीदने वाले सिंघवाहिनी इंफ्रा और उसके निदेशक प्रदीप सिंह के यहां भी तलाशी ली गई है। दिल्ली के बुराड़ी में रहने वाले राम श्याम के यहां भी छापा मारा गया। महर्षि महेश योगी की जमीन को फर्जीवाड़े बेचने वाले गिरोह की कार्यप्रणाली का खुलासा करते हुए ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इसके लिए एसआरएमएफ के फर्जी अथारिटी लेटर व बोर्ड रिजोल्यूशन के साथ ही फर्जी मुहर का इस्तेमाल किया जाता था।

इसका सौदा महंगा पड़ा

नोएडा की जमीन को दिसंबर 2025 में आकाश मालवीय ने सिंहवाहिनी इंफ्रा को महज 16 करोड़ रुपये में बेच दिया, जबकि सर्किल रेट से उसकी कीमत 33.61 करोड़ रुपये है। एक महीने बाद जनवरी 2026 में इसी जमीन को वाम देव प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को बेच दिया गया। ईडी के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार महर्षि महेश योगी की जमीन फर्जीवाड़े से बेचने के सिलसिले में उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में सात एफआइआर दर्ज होने की जानकारी है।
जिनमें एक एफआइआर 2011 में छत्तीसगढ़ में 75 एकड़ जमीन फर्जी सेल डीड के सहारे बेचे जाने की है। इसी तरह 2024 में मध्यप्रदेश के धार में फर्जी बोर्ड रिजोल्यूशन के सहारे 3.48 करोड़ की जमीन बेची गई।

ED की अधिकृत जानकारी

ED ने एक अधिकृत प्रेस रिलीज में कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जी. राम चंद्र मोहन और आकाश मालवीय नामक दो प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है, जो “द स्पिरिचुअल रीजेनेरेशन मूवमेंट फाउंडेशन ऑफ इंडिया (SRMF)” नामक संस्था की अचल संपत्तियों की फर्जी बिक्री और अवैध हस्तांतरण से संबंधित है। यह संस्था वर्ष 1963 में पंजीकृत एक चैरिटेबल सोसायटी है (SRMF- Reg. No. S/2366/1963)। दोनों आरोपियों को नई दिल्ली स्थित पटियाला हाउस कोर्ट की माननीय विशेष अदालत ने ईडी हिरासत में भेज दिया है। यह गिरफ्तारियाँ 14-15 मई 2026 को की गई व्यापक तलाशी कार्रवाई के बाद हुईं। ईडी ने एम/एस सिंहवाहिनी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. तथा उसके निदेशकों के बैंक खातों और चल संपत्तियों को भी फ्रीज करने का आदेश जारी किया है, क्योंकि उन पर इस धोखाधड़ी में संलिप्तता का आरोप है। ईडी ने 07.05.2026 को दर्ज ECIR के आधार पर जांच शुरू की थी, जो उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में दर्ज कई FIR से उत्पन्न हुई थी। इन FIR में धोखाधड़ी, जालसाजी, प्रतिरूपण (इम्पर्सोनेशन) और आपराधिक न्यास भंग (क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट) की निरंतर आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया है। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने स्वयं को मूल SRMF (Reg. No. S/2366/1963) के अधिकृत पदाधिकारी बताकर फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी, मनगढ़ंत बोर्ड प्रस्ताव और नकली प्राधिकरण पत्रों का उपयोग किया तथा ट्रस्ट की करोड़ों रुपये मूल्य की प्रमुख संपत्तियों को अवैध रूप से बेच दिया।

मुख्य सूत्रधार यही है

जी. राम चंद्र मोहन को इस साजिश का मुख्य सूत्रधार और नियंत्रणकर्ता पाया गया है। उसने वर्ष 2010 में स्वयं को SRMF का कोषाध्यक्ष बताकर धोखे से प्रस्तुत किया, समान नाम से एक फर्जी संस्था बनाई, नकली PAN प्राप्त किया (जिसे बाद में आयकर विभाग ने “फेक असेसी” बताते हुए निष्क्रिय कर दिया) तथा अपराध से अर्जित धन को घुमाने के लिए अवैध बैंक खाता खोला। आकाश मालवीय, जो उसका करीबी सहयोगी है, ने स्वयं को SRMF का कार्यकारी सदस्य बताकर अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के रूप में फर्जी बिक्री विलेखों के निष्पादन में सक्रिय सहायता की। जांच में एम/एस सिंहवाहिनी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. के निदेशक प्रदीप सिंह की सक्रिय संलिप्तता भी सामने आई है। यह पाया गया कि उन्हें पता था कि बेची जा रही भूमि SRMF (Reg. No. S/2366/1963) की है और आरोपियों को उसे बेचने का कोई वैध अधिकार नहीं था, फिर भी उन्होंने धोखाधड़ी वाले लेनदेन में जानबूझकर भाग लिया। विशेष रूप से, संबंधित बिक्री विलेख के निष्पादन के तुरंत बाद उन्होंने उसी संपत्ति के हिस्सों को तीसरे पक्षों को आगे बेच दिया। तलाशी की कार्यवाही के दौरान, ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 17(1A) के तहत प्रदीप सिंह तथा उनकी फर्म एम/एस सिंहवाहिनी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्रा. लि. के बैंक खातों, फिक्स्ड डिपॉजिट, लॉकरों तथा उच्च श्रेणी के वाहनों — जिनमें एक टोयोटा हाइब्रिड, एक लैंड रोवर डिफेंडर और एक महिंद्रा थार रॉक्स शामिल हैं — को फ्रीज़ करने के आदेश जारी किए।आगे की जांच अतिरिक्त लाभार्थियों एवं उन हितधारकों की पहचान करने के लिए जारी है, जिन्होंने इन धोखाधड़ीपूर्ण लेन-देन को संभव बनाया।

SC आदेश के महत्वपूर्ण बिंदु

- आरोप है कि कुछ अनधिकृत लोगों ने जाली दस्तावेजों और फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर संस्था की जमीनें बेच दीं।

- विभिन्न राज्यों में कई FIR दर्ज हुईं, जिनमें Uttar Pradesh, Madhya Pradesh और Chhattisgarh शामिल हैं।

- Jabalpur के थाना बरगी में भी FIR दर्ज हुई थी।

- हाई कोर्ट ने जांच जारी रखने की अनुमति दी थी, लेकिन चार्जशीट दाखिल करने पर रोक लगा दी थी।

- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल FIR को चुनौती देने के आधार पर चार्जशीट दाखिल करने पर रोक लगाना उचित नहीं था।

- न्यायालय ने कहा कि पुलिस को जांच पूरी कर BNSS की धारा 193(3) के तहत रिपोर्ट/चार्जशीट दाखिल करनी चाहिए।

- अदालत ने माना कि संस्था की संपत्तियों की लगातार बिक्री गंभीर चिंता का विषय है।

- सुप्रीम कोर्ट ने निष्पक्ष जांच के लिए SIT (Special Investigation Team) गठित करने का निर्देश दिया।

- SIT की निगरानी Uttar Pradesh के मुख्य सचिव के अधीन करने को कहा गया।

- SIT को यह जांच करने को कहा गया कि संस्था की जमीनें किस प्रकार और किन लोगों द्वारा बेची गईं।

- अदालत ने कहा कि यदि धोखाधड़ी और आपराधिक मंशा पाई जाती है तो आगे कानूनी कार्रवाई की जाए।

- अंतिम निर्णय तक आरोपियों को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया गया।