रफीक खान
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा है कि प्रदेश सरकार की कैबिनेट मिनिस्टर कुंवर विजय शाह द्वारा कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बयान है। शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब बहुत हो गया है प्रदेश सरकार आदेश का पालन करें और चार सप्ताह के भीतर अभियोजन की अनुमति मामले पर फैसला करे। कैबिनेट मिनिस्टर पर मुकदमा चलाया जाए तथा निष्पक्षता के साथ कार्रवाई की जाना चाहिए। The Supreme Court strongly reprimanded the Madhya Pradesh government, saying that a decision should be taken on granting permission for prosecution within 4 weeks.
जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मंत्री का बयान दुर्भाग्यपूर्ण था और उन्होंने बाद में माफी भी मांग ली थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह केवल दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बयान था। अदालत ने यह भी कहा कि मंत्री के व्यवहार में वास्तविक पछतावा नजर नहीं आता।सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और विजय शाह की ओर से आगे की दलीलें सुनने से इनकार करते हुए कहा कि पहले उसके पूर्व आदेश का पालन किया जाए। अदालत ने याद दिलाया कि जनवरी में दिए गए आदेश के तहत सरकार को दो सप्ताह के भीतर अभियोजन की अनुमति पर फैसला लेना था, लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया। मामले की अगली सुनवाई गर्मी की छुट्टियों के बाद होगी। एसआईटी अपनी रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि राजनीतिक नेताओं को बोलना अच्छी तरह आता है। यदि यह वास्तव में जुबान फिसलने का मामला होता, तो तुरंत स्पष्ट और बिना शर्त माफी दी जाती। विजय शाह की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने दलील दी कि मंत्री ने तुरंत सार्वजनिक माफी जारी कर दी थी। अदालत ने दोहराया कि अब यह राज्य सरकार को तय करना है कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दी जाए या नहीं। भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 के तहत अभियोजन की अनुमति राज्य सरकार से मिलना आवश्यक है।सुप्रीम कोर्ट ने SIT की सीलबंद रिपोर्ट का भी अवलोकन किया, जिसमें विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की अनुमति मांगी गई थी। अदालत ने SIT को विजय शाह से जुड़े अन्य मामलों की जानकारी भी जुटाने के निर्देश दिए थे। इससे पहले जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने विजय शाह को फटकार लगाते हुए कहा था कि वह अदालत के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। अदालत ने उनके आचरण पर सवाल उठाते हुए उनकी मंशा पर भी चिंता जताई थी।
