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Monday, 28 April 2025

जबलपुर समेत इंदौर, भोपाल और ग्वालियर के शराब कारोबारियों पर ED की रेड, एक साथ 11 जगह कार्रवाई


रफीक खान
मध्य प्रदेश में करोड़ों रुपए के फर्जी बैंक चालान के जरिए हुई शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जबलपुर समेत भोपाल, इंदौर, मंदसौर तथा ग्वालियर आदि स्थानों में 11 ठिकानों पर एक साथ छापा मार कार्रवाई की है। यहां से बड़ी संख्या में दस्तावेज, कंप्यूटर में दर्ज रिकार्ड, पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क आदि भी बरामद की गई है। सोमवार को सुबह से शुरू हुई कार्रवाई अभी भी लगातार जारी है। चौकसे, जायसवाल, शिवहरे तथा श्रीवास्तव परिवारों के सदस्यों को भी घेरे में लेकर पूछताछ की जा रही है। ED raids on liquor traders of Jabalpur, Indore, Bhopal and Gwalior, action taken at 11 places simultaneously

इस सिलसिले मिली जानकारी के अनुसार कहा जाता है कि ये कार्रवाई इंदौर, जबलपुर, भोपाल और मंदसौर में चल रही है। 49 करोड़ के फर्जी बैंक चालान घोटाले का आरोप योगेंद्र जायसवाल और विजय श्रीवास्तव पर लगा है। इनके ठिकानों पर सुबह से कार्रवाई चल रही है। बताया जा रहा है कि जब संजीव दुबे आबकारी आयुक्त थे, तब यह चालान घोटाला हुआ था, वहीं चालान घोटाले में अब तक 22 करोड़ की रिकवरी हो चुकी थी। इंदौर में बसंत विहार कालोनी, तुलसी नगर समेत अन्य ठिकानों पर ईडी की टीम जमा है। इंदौर के तुलसी नगर में रहने वाले सुरेंद्र चौकसे के घर पर ईडी की टीम पहुंची है। फिलहाल, चौकसे के घर A-296 पर ईडी की टीम दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। सुरेंद्र चौकसे आबकारी अधिकारी के पद से सेवा निवृत्त हुए हैं। सीआरपीएफ के जवान उनके बंगले के बाहर तैनात हैं। खास बात ये है कि, इस कार्रवाई से स्थानीय प्रशासन को भनक तक नहीं लगी। शिकायतकर्ता राजेंद्र गुप्ता ने ईडी को साक्ष्य और बयान दिए थे। 6 मई को ईडी ने प्राथमिकी दर्ज की थी और आबकारी आयुक्त से 5 बिन्दुओं पर जानकारी मांगी गई थी, लेकिन जो ईडी को जानकारी मिली वो अधूरी थी।मंदसौर शहर की जनता कॉलोनी में रहने वाले शराब कारोबारी अनिल त्रिवेदी के ठिकानों पर तड़के 4 बजे ईडी की रेड पड़ी। त्रिवेदी की 10 साल साल गैंगवार में हत्या कर दी गई थी। ये पूर्व में आबकारी विभाग में पदस्थ था।अवैध रूप से शराब अधिग्रहण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) हासिल की गई। इस मामले में ईडी ने शराब ठेकेदारों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की है। कहां जाता है कि आरोपी शराब ठेकेदार छोटी-छोटी रकम के चालान तैयार कर बैंक में जमा करते थे। चालान के निर्धारित प्रारूप में ‘रुपए अंकों में’ और ‘रुपए शब्दों में’ लिखे होते थे। मूल्य अंकों में भरा जाता था, हालांकि ‘रुपए शब्दों में’ के बाद खाली जगह छोड़ दी जाती थी। धनराशि जमा करने के बाद जमाकर्ता बाद में उक्त रिक्त स्थान में बढ़ी हुई धनराशि को लाख हजार के रूप में लिख देता था। साथ ही, ऐसी बढ़ी हुई धनराशि के तथाकथित चालान की प्रतियां संबंधित देशी शराब गोदाम में या विदेशी शराब के मामले में जिला आबकारी कार्यालय में जमा कर देता था।