साले साहब को उठा ले गई मुंबई पुलिस, तब खुलना शुरू हुए राज, ED समेत कई जांच एजेंसियों के रडार पर - khabarupdateindia

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साले साहब को उठा ले गई मुंबई पुलिस, तब खुलना शुरू हुए राज, ED समेत कई जांच एजेंसियों के रडार पर


रफीक खान
मध्य प्रदेश की यह खबर बड़ी चौंकाने वाली है। करोड़ों रुपए की ठगी का एक आरोपी अपने तथा कथित जीजा भाजपा विधायक BJP MLA और मध्य प्रदेश सरकार की कृपा से वीआईपी सुरक्षा लेकर घूमता रहा। बाकायदा उससे पीएचक्यू PHQ से दो गनमैन उपलब्ध कराए गए। ठगी के मामले में ज्यादातर वह नामवर लोग हैं, जिनके पास काले धन का अंबार है लेकिन इस बीच इंदौर का एक व्यवसायी आगे आने में कामयाब रहा। उसने 97 करोड रुपए की ठगी का आरोप लगाते हुए मुंबई पुलिस के पास आवेदन दिया। मुकदमा कायम हुआ और आरोपी साले साहब को गिरफ्तार कर लिया गया। साले साहब की गिरफ्तारी के बाद कई चौंकाने वाले राज सामने आए। ठगी में बड़े-बड़े मंत्री, विधायकों से लेकर संत और महंत तक ठगी के शिकार बनाए गए। मसला सिर्फ इतना है कि करोड़ों की ठगी के बाद भी काले धन के चक्कर में यह लोग फिर तक दर्ज नहीं कर सके। अब साले साहब प्रवर्तन निदेशालय ED की टीम के साथ ही अन्य जांच एजेंसियों के रडार पर भी है। Mumbai police took away brother-in-law, then secrets started getting revealed, on the radar of many investigation agencies including ED

जानकारी के मुताबिक कहा जाता है कि बीजेपी विधायक अम्बरीष शर्मा के साले सुधांशु द्विवेदी का नाम महाराष्ट्र में 97 करोड़ रुपये की ठगी में पहले से दर्ज है। द्विवेदी के खिलाफ इंदौर के व्यापारी गुरुजीत सिंह चावड़ा ने मुंबई के बांद्रा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि सुधांशु ने खुद को अनाज व्यापारी बताकर 452 करोड़ रुपये की ठगी की थी। तब चावड़ा ने बताया था कि सुधांशु ने अनाज के व्यापार में मोटा मुनाफा देने का वादा किया था और उसके कहने पर उन्होंने 340 करोड़ रुपये अपनी कंपनी से और 91.19 करोड़ रुपये गणेश एंटरप्राइजेज नामक फर्म में ट्रांसफर किए। व्यापारी का दावा है कि जब पैसे वापस मांगे, तो मुंबई के प्रभादेवी स्थित फ्लैट में सुधांशु के गुर्गों ने उन्हें बंधक बना लिया और धमकी दी कि यदि उन्होंने दोबारा यह मुद्दा उठाया, तो जान से हाथ धो बैठेंगे. इसके बाद पीड़ित ने इसकी शिकायत मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच में की। FIR दर्ज होने के बाद उसे गिरफ्तार कर आर्थर रोड जेल भेज दिया गया। इसी बीच अचानक भिंड में एक 35 वर्षीय महिला ने दुष्कर्म का आरोप लगाया जिस पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया। विधायक के साले को वीआईपी सुविधा देने के लिए उसकी बीमारी का बहाना बनाया गया। इसके बाद उसे भिंड जिला अस्पताल लाकर पूरी मीडिया से दूरी बनाकर डॉक्टरों से चैकअप कराया गया। फिर उसे वापस लहार के अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उसको वीआईपी सुविधा दी जा रही थी। इस पर अब लहार अदालत ने टिप्पणी की है कि अभियुक्त सुधांशु मोहन द्विवेदी को ऐसी कोई चिकित्सकीय आपात स्थिति नहीं थी, जिसके कारण उसे अस्पताल में भर्ती रखा जाए। ऐसे में उसे न्यायिक अभिरक्षा में न रखकर अस्पताल में रखना न्याय संगत नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बलात्कार के इस मामले में आरोपी को मुंबई की ऑर्थर रोड जेल से प्रोडक्शन वारंट पर लाया गया था। यदि उसे किसी प्रकार की चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता है, तो इसकी जिम्मेदारी ऑर्थर रोड जेल के जेल अधीक्षक की होगी और उनके निर्देशानुसार ही उपचार की व्यवस्था की जाए। यह मामला रसूख के जबरदस्त हस्तक्षेप का है। इसमें न सिर्फ ठगी करने वाला आरोपी है बल्कि सफेद पोश राजनेता और वे लोग भी प्रवर्तन निदेशालय की रडार पर है, जिन्होंने काला धन इन्वेस्ट किया और ठगी का शिकार होने के बाद मुकदमेबाजी से बचने के लिए खामोश हो गए।